हाल ही में दिल्ली और फरीदाबाद में एक बड़े आतंकी प्लॉट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी डॉक्टर शाहीन शाहिद (उर्फ शाहीन सईद) मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार की गई है। यूपी एटीएस और अन्य एजेंसियों की जांच में खुलासा हुआ है कि शाहीन जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल की अहम सदस्य थी। 1996 से अब तक उसके नाम पर तीन पासपोर्ट बने थे, जिनमें हर बार अलग-अलग पते दर्ज किए गए थे—पहला मेडिकल कॉलेज के पते पर, दूसरा पति को गार्जियन दिखाकर, और तीसरा लखनऊ के एक फर्जी पते पर। इन पासपोर्टों का इस्तेमाल शाहीन ने पाकिस्तान की तीन यात्राएं करने के लिए किया, जहां वह आतंकी संगठनों से जुड़ी।
UAE में नौकरी के दौरान कैसे बनी आतंकी?
शाहीन ने UAE में डॉक्टर के तौर पर काम किया, जहां वह आतंकियों के नेटवर्क से जुड़ी। जांच एजेंसियों को शक है कि UAE में ट्रेनिंग या मीटिंग्स के बहाने वह ‘डॉक्टर बम’ उर्फ जलाल अंसारी जैसे आतंकियों से संपर्क में आई। हाल ही में वह दुबई भागने की योजना बना रही थी और नया पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन गिरफ्तारी हो गई। इसके अलावा, पाकिस्तान से हवाला के जरिए 20 लाख रुपये भी उसके पास भेजे गए थे, जो दिल्ली ब्लास्ट जैसी साजिशों के लिए इस्तेमाल होने वाले थे।
दिल्ली प्लॉट का कनेक्शन
यह मामला दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट या कार ब्लास्ट से जुड़ा है, जहां शाहीन ‘डॉक्टर बम’ पैटर्न पर धमाके की साजिश रच रही थी। कानपुर के चमनगंज, बेगमगंज, जाजमऊ, काकादेव और रावतपुर इलाकों में उसके संपर्कों की तलाश जारी है। उसके पिता-भाई का पता भी पासपोर्ट में छिपाया गया था, जो साजिश का हिस्सा लगता है।

