उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही इस मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में नकली वोटरों को हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में लखनऊ में हुई बीजेपी की प्रदेश स्तरीय बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ चेतावनी दी कि SIR में ढिलाई बरतने वाले विधायकों और नेताओं के टिकट कट सकते हैं। यह बयान आंतरिक बीजेपी मीटिंग में आया, जहां योगी ने कहा कि SIR में लापरवाही सीधे चुनाव परिणामों को प्रभावित करेगी और कोई समझौता नहीं होगा।
योगी के बयान का सार
चेतावनी का फोकस: बैठक में योगी ने उन विधानसभाओं की सूची साझा की जहां SIR का काम कमजोर है, खासकर लखनऊ जिले में। उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे बूथ स्तर पर जाकर मतदाता सूची का वितरण सुनिश्चित करें, नकली वोटरों (जैसे एक पिता के नाम पर कई माताओं वाले केस) को फॉर्म-7 से हटवाएं और नए मतदाताओं को फॉर्म-6 से जोड़ें।
टिकट कटने का खतरा: बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने भी कहा कि SIR में सक्रिय न होने वाले सांसदों-विधायकों का भविष्य दांव पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई चुनाव लड़ने की मंशा नहीं रखता, तो पहले ही सीएम और प्रदेश अध्यक्ष को बता दें, लेकिन पार्टी को धोखा न दें। चुघ ने 26 दिसंबर तक SIR पूरा करने की डेडलाइन दी, जिसमें ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावे-आपत्तियां दर्ज करनी होंगी।
बड़ी तस्वीर: योगी ने जोर दिया कि SIR न सिर्फ 2027 के चुनाव, बल्कि अगले 8 विधानसभा और लोकसभा चुनावों को प्रभावित करेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि शादियों-भोज जैसे अन्य काम छोड़कर सिर्फ SIR पर फोकस करें।
किन विधायकों का टिकट खतरे में?
स्रोतों में कोई विशिष्ट विधायकों के नाम नहीं बताए गए हैं। यह चेतावनी सामान्य रूप से उन विधायकों पर लागू है, जिनके क्षेत्रों में SIR का प्रदर्शन कमजोर है। हालांकि, बीजेपी के आंतरिक सर्वे से 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की संभावना पहले से ही चर्चा में थी, जो अब SIR प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। लखनऊ जैसे संवेदनशील जिलों के विधायक सबसे ज्यादा निशाने पर हैं।
सियासी हलचल और प्रतिक्रियाएं
बीजेपी के अंदर: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी SIR को 2027 की जीत की कुंजी बताया। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विधायकों को सभी अन्य गतिविधियां रोककर SIR में जुटने का आदेश दिया। पार्टी को चिंता है कि SIR से करीब 4 करोड़ नाम कटे हैं, जिनमें 85-90% बीजेपी समर्थक बताए जा रहे हैं। योगी ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रिय होकर इन नामों को जोड़ने को कहा।
विपक्ष का हमला: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया और दावा किया कि कटे नामों में बीजेपी के ही समर्थक हैं, जो मुस्लिम-यादव बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाने की साजिश है। विपक्ष SIR को ‘जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग’ का हथियार बता रहा है, जिससे 2027 चुनावों में फायदा-नुकसान का डर है।
बेहतर प्रदर्शन का दबाव: योगी ने कहा कि बारीक अंतर से जीत-हार वाले क्षेत्रों में SIR की भूमिका निर्णायक होगी। पार्टी ने संवेदनशील बूथों की पहचान कर ईसीआई को रिपोर्ट करने को कहा।







