मालेगांव मामले पर भी डिंपल ने सवाल उठाए, विशेष रूप से जांच प्रक्रिया और फैसले की विश्वसनीयता को लेकर। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्षता की कमी लोकतांत्रिक संस्थानों पर भरोसे को कम करती है। हालांकि, उनके बयानों पर कुछ ने यह भी कहा कि यह समाजवादी पार्टी की ओर से राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि विपक्षी दलों को एकजुट किया जाए।
चुनाव आयोग ने जवाब में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए है, जिसमें मृत, पलायन कर चुके, या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। आयोग ने दावा किया कि यह प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की जा रही है, और संदिग्ध मामलों में नोटिस जारी किए जाएंगे।
डिंपल के इन बयानों ने बिहार और उत्तर प्रदेश में सियासी माहौल को गरमा दिया है, खासकर जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। विपक्षी नेता, जैसे तेजस्वी यादव, ने भी इस मुद्दे पर समान रुख अपनाया है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है
बिहार में 60 लाख वोटरों के नाम काटने पर चुनाव आयोग पर बरसीं डिम्पल यादव

डिंपल यादव ने हाल ही में बिहार में चुनाव आयोग द्वारा 60 लाख वोटरों की सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। उनका कहना है कि यह कदम मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर करता है और विशेष रूप से सीमांचल जैसे क्षेत्रों में इसका प्रभाव गंभीर हो सकता है, जहां सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोग रहते हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए, यह दावा करते हुए कि यह राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है।
