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“नियत बड़ी या संप्रभुता – श्री धीरज अग्रवाल की सेवा भावना को अभिवादन”

नई दिल्ली । यदि आपकी नियत साफ हो, तो आप बिना किसी बड़ी संपत्ति या प्रतिष्ठा के भी समाज की सेवा कर सकते हैं।” इस बात को सिद्ध करते हैं धीरज अग्रवाल, जो राजमंदिर, राजापुरी क्षेत्र द्वारका के सामने एक छोटी सी खाने पीने की सामग्री की दुकान चला अपना जीवनयापन करते है साथ ही निःस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की सेवा कर रहे हैं।

 

धीरज अग्रवाल का यह स्टॉल “लाला जी की रसोई” नाम से चलता है, जहाँ पर स्वच्छ, स्वादिष्ट और सस्ता भोजन उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन यह स्टॉल खास इसलिए है क्योंकि जब कोई भूखा, असहाय या निर्धन व्यक्ति भोजन मांगता है, तो धीरज उसे न केवल सम्मानपूर्वक भोजन कराते हैं, बल्कि बैठने के लिए स्टूल, पीने को छाछ और आत्मीयता भरा व्यवहार भी देते हैं। भोजन के उपरांत वे स्वयं उनके बर्तन उठाकर कूड़ेदान में डालते हैं। राष्ट्रीय युवा चेतना मंच, भारत के राष्ट्रीय महासचिव महेश मिश्रा ने कहा, “हम धीरज अग्रवाल की इस निःस्वार्थ सेवा भावना को नमन करते हैं। अगर हम में से एक भी व्यक्ति उनकी तरह सेवा की नियत रख ले, तो हमारी संस्कृति में फिर से इंसानियत का प्रकाश फैल सकता है। यह प्रेरणादायक उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि मदद के लिए संसाधन नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, सच्ची भावना/नियत और सेवा का जज़्बा चाहिए।

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