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जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में FIR की मांग, HC ने कहा, ‘आपके पास कोई…’

जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के दौरान कथित तौर पर बड़ी मात्रा में कैश मिलने के मामले में FIR दर्ज करने और CBI या SIT से जांच कराने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसे अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय ने दाखिल की थी।

 

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- यह वाइल्ड विच हंट है

 

जस्टिस अमित बंसल ने याचिका पर सुनवाई के दौरान इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने टिप्पणी, “मैं इसे एंटरटेन नहीं कर रहा हूं. यह एक वाइल्ड विच हंट है. आपके पास करने के लिए इससे बेहतर कोई काम नहीं है.”

 

याचिकाकर्ता के अधिकार पर उठाया सवाल

 

सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों ने याचिकाकर्ता के लॉकस यानी याचिका दाखिल करने के अधिकार पर सवाल उठाया। उनकी ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता के पास दूसरे कानूनी उपाय भी उपलब्ध हैं. इसके बाद उपाध्याय ने याचिका वापस लेने और वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देने का अनुरोध किया. हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

 

सुप्रीम कोर्ट भी खारिज कर चुका है ऐसी याचिका

 

याचिकाकर्ता  ने इससे पहले इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को उनकी समान याचिका खारिज कर दी थी।

 

आग बुझाने के दौरान मिला था कैश

 

मामला 14 मार्च 2025 का है। उस समय जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे। उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद दमकलकर्मी आग बुझाने पहुंचे थे। इसी दौरान आवास के एक आउटहाउस में बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने की बात सामने आई थी. घटना के बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा में आया था।

 

CJI ने गठित की थी तीन जजों की कमेटी

 

घटना के बाद तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जांच के बाद मई 2025 में अपनी रिपोर्ट तत्कालीन CJI को सौंपी. रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा की भूमिका को लेकर प्रथम दृष्टया जवाबदेही की बात कही गई थी. इसके बाद रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई।

 

जस्टिस वर्मा को वापस इलाहाबाद HC भेजा गया

 

जांच के दौरान जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया था। उनका न्यायिक काम भी वापस ले लिया गया था। बाद में मामले से जुड़े दस्तावेज, फोटो और वीडियो सुप्रीम कोर्ट की ओर से सार्वजनिक किए गए।

 

जांच और हटाने की प्रक्रिया को दी थी चुनौती

 

जस्टिस वर्मा ने इन-हाउस जांच और उन्हें हटाने की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया के तहत तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की. जस्टिस वर्मा ने इस कमेटी के गठन को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई।

 

जांच के दौरान दिया इस्तीफा

 

इसके बाद लोकसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ी. इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

 

याचिकाकर्ता ने कहा था- स्वतंत्र जांच जरूरी

 

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि वह जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनका कहना था कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र आपराधिक जांच जरूरी है और FIR दर्ज होना उसका पहला कदम है। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने  इस याचिका को स्वीकार नहीं किया और इसे खारिज कर दिया।

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