दिल्ली में बच्चियों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। हाल के आंकड़ों और समाचारों के आधार पर, राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों, खासकर लड़कियों के खिलाफ यौन शोषण और अपराध के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। हालांकि, “रोज इतने आरोपी होते हैं गिरफ्तार” के दावे को सटीक रूप से पुष्ट करने के लिए दैनिक गिरफ्तारी के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कुछ विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है।
आंकड़े और स्थिति:
2018-19 में दिल्ली में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण के मामले 63% तक दर्ज किए गए, जो 2016-17 में 46% थे। यह दर्शाता है कि पिछले कुछ वर्षों में इन अपराधों में वृद्धि हुई है।
एक पुराने 2013 के समाचार के अनुसार, दिल्ली में हर साल लगभग 7,200 बच्चों के साथ यौन शोषण होता है, और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में दिल्ली देश में तीसरे स्थान पर है।
2025 में X पर एक पोस्ट में दावा किया गया कि दिल्ली में औसतन प्रतिदिन चार बच्चे यौन हिंसा का शिकार हो रहे हैं, और अक्सर आरोपी परिवार या पड़ोस के लोग होते हैं।
2021 में राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नाबालिगों के खिलाफ 31,000 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें 37,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। हालांकि, यह पूरे देश का डेटा है, दिल्ली का हिस्सा स्पष्ट नहीं है।
हाल की घटनाएं:
जुलाई 2025 में, दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बच्चों की तस्करी के एक रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह रैकेट मासूम बच्चों, खासकर लड़कियों को निशाना बनाता था।
2025 में एक अन्य मामले में, दो साल की बच्ची के साथ बलात्कार के आरोपी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में दिल्ली पुलिस को बाल तस्करी के एक मामले में तत्काल कार्रवाई करने और लापता बच्चों को ढूंढने का आदेश दिया, जिससे इस समस्या की गंभीरता उजागर हुई।
कानूनी प्रावधान:
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत सख्त सजा का प्रावधान है। इसमें न केवल अपराधी, बल्कि अपराध को छिपाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होती है।
नाबालिग अपराधियों के मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट लागू होता है, जिसके तहत उन्हें जेल के बजाय सुधार गृह में रखा जाता है।
चुनौतियां:
कई मामलों में परिवार वाले शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे वास्तविक आंकड़े और भी अधिक हो सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में मानव तस्करी से मुक्त कराई गई नाबालिग लड़कियों के मामले में पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए, जैसे कि उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश न करना।
स्कूलों और बाल आश्रमों में सुरक्षा के अपर्याप्त इंतजाम भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।

