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कमबख़्त हत्यारिन जाति …

कमबख़्त जाति
न पद देखती है
न मद देखती है
न क़द देखती है
न हद देखती है
जाति तो
सिर्फ़ जात देखती है
बात बात पर
शर्मसार करती है
न कानून से डरती है
न बापू की सुनती है ..
सरे राह बलात्कार करती है ..
मंदिर हो या मस्जिद,
गाली गलौज करती है ..
कुकुर खाने वालों,
को पंडित कहती है ..
शबरी के बेर को,
चमार कहती है ..
राम के नाम पर,
व्याभिचार करती है ..
हर काल युग में,
जूतम लात करती है ..
कमबख़्त जाति
सरे राह बलात्कार करती है ..

IPS पूरन कुमार को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित ।।

केएम भाई

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