उत्तर प्रदेश में पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन सिंह द्वारा 29 जुलाई को जारी एक विवादास्पद आदेश ने हड़कंप मचा दिया। इस आदेश में प्रदेश की 57,691 ग्राम पंचायतों में यादव और मुस्लिम समुदायों द्वारा कथित अवैध कब्जों को हटाने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें ग्राम सभा की जमीनों, पोखरों, खलिहानों, श्मशान भूमि आदि को मुक्त कराने की बात कही गई। इस आदेश को जाति और धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण मानते हुए विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी ने इसे संविधान विरोधी और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने वाला बताया।
मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा, जिन्होंने इस आदेश को शासन की नीतियों के खिलाफ और समाज में विभाजन पैदा करने वाला करार देते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्देश दिया। सीएम ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए संयुक्त निदेशक एसएन सिंह को तत्काल निलंबित कर दिया और अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी गलती न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई निष्पक्षता और कानून के आधार पर होनी चाहिए, न कि जाति या धर्म के आधार पर।







