बाढ़ के मुख्य कारण
यमुना की बाढ़ प्राकृतिक और मानवीय कारकों का मिश्रण है:
फ्लडप्लेन पर अतिक्रमण: दिल्ली में यमुना के किनारे अवैध कॉलोनियां, बाजार और निर्माण हो गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक बहाव को रोकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, बैराज ऑपरेशन की गलतियां और फ्लडप्लेन का अतिक्रमण मुख्य कारण हैं।
प्रदूषण और सिल्ट जमा: नदी में कचरा, सीवर और सिल्ट जमा होने से उसकी गहराई कम हो गई है। दिल्ली में यमुना का 22 किमी हिस्सा 80% प्रदूषण का स्रोत है। ड्रेनेज सिस्टम की कमियां: शहर की नालियां चोक हो जाती हैं, जिससे पानी शहर में फैल जाता है। ऐतिहासिक रूप से, 2010, 2013, 2023 और 2025 में बाढ़ आईं, जहां जल स्तर 206-208 मीटर तक पहुंचा।
जिम्मेदारी किसकी?
दिल्ली सरकार (आप या भाजपा, जो भी सत्ता में हो): सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) की जिम्मेदारी है कि नदी की ड्रेजिंग (सफाई) और बैराज का प्रबंधन करे। 2025 में दिल्ली सरकार ने हरियाणा के साथ समन्वय कर बाढ़ तैयारी की, लेकिन अतिक्रमण हटाने में देरी हुई।
केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA): यमुना की सफाई और फ्लडप्लेन की सुरक्षा DDA की जिम्मेदारी है, जो केंद्र के अधीन है। जल शक्ति मंत्रालय ने ‘यमुना मास्टर प्लान’ बनाया, लेकिन क्रियान्वयन में कमी रही।
हरियाणा सरकार: हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ने का नियंत्रण हरियाणा के पास है, जो दिल्ली में बाढ़ का बड़ा कारण बनता है। दिल्ली अक्सर हरियाणा पर पानी कम छोड़ने या ज्यादा छोड़ने का आरोप लगाती है।
लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) कार्यालय: 2025 में LG ने यमुना सफाई के लिए चार-स्तरीय रणनीति लागू की, जिसमें कचरा हटाना, नालियों की सफाई और नए STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाना शामिल है। लेकिन राजनीतिक विवादों से काम प्रभावित होता है।
नागरिक और स्थानीय निकाय: MCD (म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली) कचरा प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है, लेकिन प्रदूषण रोकने में असफल रही। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, शहरवासियों का कचरा फेंकना भी समस्या बढ़ाता है।
राजनीतिक स्तर पर, AAP और BJP एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं। उदाहरण के लिए, 2023-2025 में BJP ने AAP को दोषी ठहराया, जबकि AAP ने केंद्र और हरियाणा को।
कैसे थमेगी हर साल की तबाही?
हर साल की बाढ़ को रोकने के लिए दीर्घकालिक और तत्काल उपाय जरूरी हैं:
फ्लडप्लेन की बहाली: अतिक्रमण हटाकर यमुना के किनारों को इको-पार्क या वन क्षेत्र में बदलें। इससे जैव विविधता बढ़ेगी और बाढ़ का खतरा कम होगा।
बेहतर समन्वय और प्रबंधन: केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने सुझाव दिया है कि दिल्ली, हरियाणा और केंद्र मिलकर एक पैनल बनाएं। बैराज ऑपरेशन को सुधारें और रियल-टाइम मॉनिटरिंग करें। सफाई और प्रदूषण नियंत्रण: यमुना में सिल्ट, कचरा और सीवर हटाने के लिए नियमित ड्रेजिंग। नए STP बनाएं और औद्योगिक अपशिष्ट पर सख्ती बरतें। 2025 में LG ने 3 साल में नदी साफ करने का लक्ष्य रखा है।
शहरी नियोजन और ड्रेनेज सुधार: दिल्ली की ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करें, बाढ़ चेतावनी सिस्टम लगाएं और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान बनाएं। NDRF जैसी एजेंसियों को पहले से तैयार रखें।
समुदाय भागीदारी: लोगों को जागरूक करें कि नदी में कचरा न फेंकें और फ्लडप्लेन पर निर्माण न करें। यदि ये उपाय सख्ती से लागू हों, तो हर साल की तबाही रुक सकती है। लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और सभी पक्षों का सहयोग जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना को सम्मान देकर ही दिल्ली सुरक्षित रहेगी

