21 नवंबर को SCAORA (सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन) द्वारा आयोजित इस समारोह में जस्टिस गवई ने अपने धार्मिक विश्वासों और पारिवारिक परंपराओं पर खुलकर बात की, जबकि जस्टिस सूर्यकांत ने उनकी 20 साल पुरानी दोस्ती का जिक्र किया। जस्टिस गवई का रिटायरमेंट 23 नवंबर को है, और उसके बाद जस्टिस सूर्यकांत CJI का पद संभालेंगे। आइए, मुख्य बिंदुओं पर नजर डालें:
जस्टिस गवई के धार्मिक विश्वास और दरगाह वाले बयान
जस्टिस गवई ने बताया कि वे बौद्ध धर्म का अनुसरण करते हैं, लेकिन किसी भी धर्म का गहरा अध्ययन नहीं किया। फिर भी, वे खुद को पूरी तरह सेक्युलर मानते हैं और सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा, “मैं वाकई सेक्युलर हूं और हिंदू, सिख, इस्लाम व ईसाई धर्मों समेत सब कुछ में विश्वास रखता हूं।”
उन्होंने अपने पिता से सीखी सेक्युलरिटी का जिक्र किया, जो डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के अनुयायी थे। गवई ने खुलासा किया कि उनका परिवार दरगाह (सूफी मزار) भी जाता था। उनके पिता के अनुसार, “कोई दरगाह के बारे में बताता था… हम वहां चले जाते थे।” यह उनके दलित समुदाय की जड़ों और अंतर-धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है।
गवई ने कहा कि उनकी जिंदगी डॉ. अंबेडकर और संविधान से प्रेरित रही है। “जो कुछ भी आज हूं, यह इसी संस्था की वजह से हूं। मैं हमेशा आभारी रहूंगा। मैं इस मुकाम तक डॉ. अंबेडकर और संविधान की वजह से पहुंचा।”
गवई ने कहा कि उनकी जिंदगी डॉ. अंबेडकर और संविधान से प्रेरित रही है। “जो कुछ भी आज हूं, यह इसी संस्था की वजह से हूं। मैं हमेशा आभारी रहूंगा। मैं इस मुकाम तक डॉ. अंबेडकर और संविधान की वजह से पहुंचा।”
जस्टिस सूर्यकांत की ’20 साल वाली बात’
जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि उनकी जस्टिस गवई से दोस्ती 20 साल पुरानी है, जो 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ लेने से पहले की है। उन्होंने कहा, “मेरा जस्टिस गवई से जुड़ाव 24 मई 2019 से नहीं शुरू हुआ, जब हम साथ शपथ लेने वाले थे। असल में, हमारी दोस्ती दो दशकों पुरानी है। हमारे दोस्ती के कुछ शानदार यादें हैं।”
सूर्यकांत ने NALSA (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) में साथ काम करने का जिक्र किया, जहां वे चेयरपर्सन थे और गवई के भाई बाद में CJI बने। उन्होंने गवई की आम आदमी के लिए प्रतिबद्धता की तारीफ की, जो NALSA में उनके नेतृत्व में शुरू की गई पहलों को सफल बनाने में सहयोगी बने।
सूर्यकांत ने NALSA (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) में साथ काम करने का जिक्र किया, जहां वे चेयरपर्सन थे और गवई के भाई बाद में CJI बने। उन्होंने गवई की आम आदमी के लिए प्रतिबद्धता की तारीफ की, जो NALSA में उनके नेतृत्व में शुरू की गई पहलों को सफल बनाने में सहयोगी बने।
समारोह का संदर्भ
यह समारोह गवई के CJI के रूप में 6 महीने और सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में 6.5 साल के कार्यकाल का सम्मान करने के लिए था। उन्होंने अपनी गरीब पृष्ठभूमि (म्युनिसिपल स्कूल में फर्श पर पढ़ाई) का जिक्र किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट CJI-केंद्रित नहीं, बल्कि सभी जजों, बार एसोसिएशन, रजिस्ट्री और स्टाफ पर आधारित होना चाहिए।
गवई ने संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—पर चलने की बात दोहराई।
गवई ने संविधान के मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—पर चलने की बात दोहराई।

