
मुख्य तथ्य:
* 9 अप्रैल 2026 से रिचा ग्लोबल से शुरू हुए आंदोलन में 40,000-45,000 श्रमिक शामिल हुए। 10 साल से 11,314 रुपये पर अटकी न्यूनतम मजदूरी, बोनस-ओवरटाइम से इनकार और एलपीजी संकट इसके कारण बने। • 13-17 अप्रैल के बीच 1,200 गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें 350+ नाबालिग शामिल। यूनियन नेता नजरबंद, सीटू कार्यालय सील, ड्रोन से निगरानी की गई। • ये कार्रवाइयाँ ILO कन्वेंशन 87 व 98, संविधान के अनुच्छेद 19 और श्रम कानूनों का उल्लंघन हैं।
सीटू की मांग: हिरासत में बंद श्रमिकों की तुरंत रिहाई, FIR वापसी, पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच, सामूहिक सौदेबाजी बहाल करना और भारत-यूपी सरकार को जवाबदेह ठहराना। महासचिव अनियन पी०वी० ने कहा: “नोएडा की घटनाएं दिखाती हैं कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाएं ग्लोबल साउथ के मजदूरों के लिए गुलामी की जंजीर बन गई हैं। त्रिपक्षीय वार्ता की जगह पुलिस दमन हो रहा है। ILO को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।”

