अमेरिकी अधिकारियों ने जॉर्डन में जुलाई में यूएस मिलिट्री बेस पर हुए मिसाइल हमले को चीन से जोड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहनाा है कि चीनी संस्थाओं द्वारा ईरान को उपलब्ध कराई गई हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी के चलते ईरान ये हमला कर पाया था। इस हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को अपनी एक खास रिपोर्ट में ये जानकारी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि तेहरान ने चीनी संस्थाओं से जॉर्डन में मौजूद बेस की हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे स्पष्ट सबूत है कि युद्ध के दौरान ईरान को चीन से मिले समर्थन के कारण अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अधिकारियों ने बताया है कि अमेरिका ने इन तस्वीरों का संबंध उस हमले से जोड़ा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने क्या कहा
घटना से परिचित अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि तेहरान ने मुवफ्फक सलती एयर बेस की उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। यही अड्डा घातक हमले का निशाना बना। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने उन चीनी संस्थाओं का नाम नहीं बताया, जिन्होंने ईरान को ये तस्वीरें दीं।
चीन ने साफ इनकार किया
इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों ने बीजिंग के सीधे शामिल होने का भी आरोप नहीं लगाया है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान को हमले से पहले और बाद दोनों समय ये तस्वीरें मिलीं। अमेरिकी अधिकारियों ने जब ये आरोप चीन के सामने रखे तो चीन ने इससे साफ इनकार कर दिया और सबूत मांगे. इससे पहले मई में वॉशिंगटन ने 3 चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे. आरोप था कि उन्होंने ईरान को ऐसी सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराई थीं। बता दें कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने जॉर्डन में जुलाई में उस आवासीय क्षेत्र पर हमला किया था, जहां अमेरिकी सैनिक सो रहे थे, जिसमें तीन सैनिक मारे गए और चार अन्य घायल हुए थे। यह हमला 24 घंटों के भीतर उस अड्डे पर हुए 3 मिसाइल हमलों में से एक था और अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद पहली बार अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई।

