चरण सिंह
भले ही पहलगाम आतंकी हमले में 26 भारतीयों की मौत हुई हो। भले ही केंद्र सरकार आतंकियों और उनके समर्थकों को मुंहतोड़ जवाब देने की बात कर रही हो, दोनों ओर से व्यापार रोक दिया गया हो। मीडिया युद्ध चला रहा हो पर भारत और पाकिस्तान में युद्ध नहीं होने जा रहा है। बस दो चार मिसाइल दागी जा सकती है। एयर स्ट्राइक की जा सकती है। युद्ध न होने का बड़ा कारण भारत का तरक्की करना है। पाकिस्तान तो चाह ही रहा है कि जनता के आक्रोश से बचने के लिए युद्ध हो जाए। जिससे देश के नाम पर जनता के गुस्से को कम किया जा सके। युद्ध होने पर पाकिस्तान को तो ज्यादा नहीं बिगड़ेगा। वह तो भूखा नंगा देश है। भारत साल पीछे चला जाएगा।
भारत की विडंबना यह है कि पड़ोसी देशों पर भी विश्वास नहीं किया जा सकता है। बांग्लादेश मौके की तलाश में है। चीन ने पाकिस्तान का साथ देने को कह दिया है। श्रीलंका और नेपाल का कोई भरोसा नहीं। ऐसे में भारत युद्ध से बच रहा है। युद्ध न होने का एक बड़ा कारण सेना में अग्निवीर योजना लाना भी है। ऐसा नहीं है कि भारत कोई कमजोर देश है। भारत पाकिस्तान से बहुत मजबूत है। जिस तरह से 1965 -1971 में पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। ऐसे ही इस बार भी मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है। पीएम मोदी जो दुनिया भर में युद्ध नहीं बुद्ध का संदेश दे रहे है। यही बात भारत पर भी लागू हो रही है। इसने दो राय नहीं कि एक भी आतंकी का पकड़ा न जाना और मारा न जाना भारत की फ़जियत बढ़ा रहा है। केंद्र चाहता है कि कुछ ऐसा कुछ कर दिया जाए कि बदला लेने संदेश चला जाए। जातीय जनगणना का फैसला भी इसलिए किया गया है कि लोग पहलगाम हमले से ध्यान हटाकर जातीय जनगणना में लगा लें। वैसे भी पीएम मोदी की बॉडी लेंग्वेज से भी नहीं लग रहा है कि युद्ध होने जा रहा है।
आतंकी हमले को 15 दिन हो गए हैं पर पर पाक को कोई बड़ा झटका नहीं दिया गया है। केंद्र सरकार का प्रयास यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग थलग कर दिया जाए। वैसे यह काम तो भारत लंबे समय से कर रहा है पर पाकिस्तान बीच बीच में आतंकी हमला करा देता है। इसमें दो राय नहीं कि इस बार जनता में बहुत गुस्सा है। एयर स्ट्राइक से बात बनने वाली नहीं है। इस बार तो बड़ा झटका चाहिए। इस बार सरकार मीडिया से भी लोगों को भ्रमित नहीं कर पा रही है। मीडिया तो सिंधु समझौते के रद्द होने पर पाकिस्तान को प्यासा मारना शुरू कर दिया था पर लोगों की समझ में आ गया कि अभी कोई पानी नहीं रोका जा सकता है। इस बार तो मोदी समर्थक भी उनकी आलोचना करने लगे हैं। समझ तो सभी रहे हैं पर जाति धर्म के नाम पर बंटे होने के कारण खुलकर बोल नहीं पा रहे हैं। अब देखना यह है कि मोदी सरकार आखिर करती क्या है।

