प्रमुख बिंदु:
समय सीमा:
देश के अधिकांश हिस्सों में जनगणना 1 मार्च 2027 से शुरू होगी, जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि होगी।
बर्फीले क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड) में यह 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी।
चरण:
पहला चरण: हाउस लिस्टिंग (मकानों की गणना), जिसमें घरों और परिवारों की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह 2026 में शुरू होगा।
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, आयु, लिंग, शिक्षा, और जाति दर्ज की जाएगी। यह फरवरी 2027 से शुरू होकर 1 मार्च 2027 तक पूरा होगा।
जातिगत जनगणना:
यह पहली बार होगा जब स्वतंत्रता के बाद जनगणना में जातियों की गिनती शामिल होगी। प्रश्नावली में जाति का एक नया कॉलम होगा।
डिजिटल प्रक्रिया:
जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें मोबाइल ऐप्स और टैबलेट का उपयोग होगा। लोग स्व-गणना (self-enumeration) के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी भर सकेंगे।
डेटा सुरक्षा:
डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए सख्त इंतजाम किए जाएंगे। कोई तृतीय-पक्ष डेटा साझाकरण नहीं होगा।
कर्मचारी और प्रशिक्षण:
लगभग 33-34 लाख गणनाकर्ता (मुख्य रूप से स्कूली शिक्षक) और 1.2-1.3 लाख पर्यवेक्षक तैनात होंगे। इन्हें नए सिरे से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आंकड़े जारी करने की समयसीमा:
जनगणना मार्च 2027 तक पूरी होने के बाद, लिंग-वार और जाति-वार डेटा दिसंबर 2027 तक जारी हो सकता है।
महत्व:
यह जनगणना सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण होगी, खासकर आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर। यह 2011 के बाद पहली जनगणना होगी, क्योंकि कोविड-19 के कारण 2021 की जनगणना स्थगित हो गई थी।
केंद्र सरकार ने जारी किया जनगणना का नोटिफिकेशन!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 2027 में होने वाली जनगणना के लिए 16 जून को राजपत्र अधिसूचना जारी की है। यह भारत की 16वीं जनगणना होगी, जो दो चरणों में आयोजित की जाएगी।
