अनुपमा सिंह उन युवा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में आकर्षक करियर छोड़कर सिविल सेवा का रास्ता चुना। इंजीनियरिंग और फाइनेंस की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनी KPMG में सलाहकार के रूप में काम किया। बेहतर वेतन और स्थिर करियर के बावजूद उनका लक्ष्य देश की सेवा करना था। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने UPSC की परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल कर भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुईं।
शैक्षणिक रूप से भी उनका रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (FMS) से वित्त में एमबीए की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने CFA कार्यक्रम भी किया, जिसमें कॉरपोरेट फाइनेंस, वैल्यूएशन और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट जैसे विषयों में विशेषज्ञता हासिल की।
वर्ष 2014 बैच की अधिकारी अनुपमा सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया. पिछले नौ वर्षों से अधिक समय से वह भारतीय विदेश सेवा में विभिन्न कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। विदेश नीति, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कला, संस्कृति और साहित्य में उनकी विशेष रुचि मानी जाती है।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए उसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश बताया. उन्होंने कहा कि भारत ऐसे देश की टिप्पणियों पर अधिक ध्यान नहीं देता जो आतंकवाद, आर्थिक संकट और अपनी ही जनता के असंतोष जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो. उनके इस जवाब को भारत की सशक्त कूटनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
अनुपमा सिंह की यात्रा यह दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और स्पष्ट लक्ष्य के साथ करियर की दिशा बदली जा सकती है. कॉरपोरेट जगत से लेकर वैश्विक कूटनीति के मंच तक का उनका सफर आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

