यह कार्रवाई उस समय हुई जब किसान संघर्ष मोर्चा ने 10% आबादी प्लॉट, नए कानून, किसानों की जमीनों के निस्तारण और अन्य सामूहिक मुद्दों को लेकर 25 सितंबर को कलेक्ट्रेट पर महापंचायत का ऐलान किया था। पुलिस कमिश्नर से वार्ता के बाद किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और मुख्य सचिव व प्राधिकरण अधिकारियों के स्तर पर वार्ता आयोजित करने का आश्वासन दिया गया था। इसी आधार पर किसान संघर्ष मोर्चा ने अपनी महापंचायत स्थगित कर दी थी।
डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन करता है। हमने पुलिस कमिश्नर के आश्वासन पर महापंचायत स्थगित की थी, परंतु यदि पहले की तरह वादों को पूरा नहीं किया गया तो अक्टूबर में मोर्चा मजबूर होकर बड़ा आंदोलन करेगा।”
सुखबीर खलीफा ने कहा कि एक्सपो मार्ट के उद्घाटन में उद्योगपतियों और व्यापारियों की भागीदारी रही, लेकिन किसानों का प्रतिनिधित्व पूरी तरह गायब था। यह सरकार किसानों को प्राथमिकता में नहीं रखती। सारी विकास परियोजनाएँ किसानों की जमीन पर बन रही हैं, लेकिन किसानों को उनका हक नहीं मिल रहा।”
सोरन प्रधान ने कहा ने कहा कि गौतम बुध नगर का किसान पूरी तरह उपेक्षित है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने किसानों की समस्याओं पर एक शब्द नहीं कहा। जमीनें सस्ती दर पर खरीदकर महंगे दामों पर बेची जा रही हैं, जबकि 10% प्लॉट की समस्या वर्षों से लंबित है। इससे किसानों में भारी आक्रोश है। किसान संघर्ष मोर्चा का मानना है कि सरकार व प्रशासन का यह डर और नजरबंदी की कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि किसान आंदोलन की ताकत से शासन-प्रशासन भयभीत है।

