बीजेपी के खिलाफ राजपूतों के लामबंदी कर रहे हैं पूर्व सांसद
2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के लिए काम कर सकते हैं बृजभूषण शरण सिंह
चरण सिंह
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक ओर सपा मुखिया अखिलेश यादव की तारीफ करते देखे जा रहे हैं तो दूसरी ओर बीजेपी में राजपूतों की उपेक्षा का मुद्दा उठा दिया है। बिहार के भागलपुर में वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव ने उन्होंने राजपूतों के वजूद की बात करते हुए बिना बीजेपी के नाम लिए हुए बोला कि यदि हम लोग बोझ लग रहे हैं तो को दो कि हमारी जरुरत नहीं हैं। फिर हम अपनी हैसियत बताएंगे।
दरअसल बृजभूषण शरण ने 2029 में लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने गत लोकसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काटकर उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट दिया था। करण भूषण सिंह केसरगंज से सांसद हैं। ऐसे में बड़ा प्रश्न उठता है कि जब बीजेपी से उनके बेटे सांसद हैं तो फिर बृजभूषण शरण सिंह को किसी दूसरी पार्टी से टिकट लेना पड़ेगा। समाजवादी पार्टी उनकी पसंदीदा पार्टी है। वैसे भी वह 2009 में सपा से सांसद बने थे। 2014 में वह फिर से बीजेपी में आ गए थे। 2014-2019 में बीजेपी से सांसद रहे। वह 11 साल कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी रहे। 2024 ले लोकसभा चुनाव से पहले महिला खिलाड़ियों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगा दिया। अंतर्राष्ट्रीय पहल विनेश फोगाट और साक्षी मलिक ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उस समय जब बीजेपी के नेता भी बृजभूषण शरण के पक्ष में नहीं बोल पा रहे थे तब अखिलेश यादव ने कहा था कि बृजभूषण शरण सिंह के बारे में कुछ भी माना जा सकता है पर वह चरित्रहीन हैं। वह पहलवान हैं।
वह महिला पहलवानों के बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप ही थे कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट कट गया। अब बृजभूषण लगातार अखिलेश यादव की तारीफ कर रहे हैं। अब जब अखिलेश यादव का पुतला जलाते हुए बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल झुलस गईं तो अखिलेश यादव उनका हाल जाने के लिए अस्पताल पहुंचे तो बृजभूषण शरण सिंह ने यह उनका बड़प्पन बताया। जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव से बृजभूषण शरण सिंह के सपा में आने की बात पूछी तो उन्होने बृजभूषण शरण सिंह को गोंडा के नेता बताया।
भले ही आज की तारीख में अखिलेश यादव पीडीए की बात कर रहे हैं पर किसी समय सपा में राजपूतों के कई कद्दावर नेता थे। अमर सिंह, मोहन सिंह, कीर्तिवर्धन सिंह, सीएन सिंह, जगदीश राणा, अखिलेश सिंह, अरविन्द सिंह गोप, राकेश राणा, यहां तक कि राजा भैया भी सपा के साथ थे। जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने राजा भैया पर पोटा लगाया तो मुलायम सिंह ने राजा भैया का साथ दिया था। राजा भैया से पोटा हटवाने में मुलायम सिंह का बड़ा योगदान माना जाता है।
आज की तारीख में जब यूजीसी एक्ट के खिलाफ राजपूत समाज बीजेपी से नाराज बताया जा रहा है तो बृजभूषण शरण सिंह भी यूजीसी एक्ट का विरोध करते देखे जा रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश बृजभूषण शरण सिंह के करीबी किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह यूजीसी एक्ट के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। पूरन सिंह वह नेता हैं जिन्होंने गत लोकसभा चुनाव में राजपूतों की ताकत का एहसास कराया था। दरअसल जब बीजेपी सांसद पुरुषोत्तम रुपाला ने राजपूतों के खिलाफ आपत्तिजनक टी टिप्पणी कर दी तो पूरन सिंह ने मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, अलीगढ़ में राजपूतों की पंचायतें कर राजपूतों की लामबंदी की थी। जिसका असर यह हुआ था कि सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद, मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक और कैराना से इकरा हसन सांसद बनी थी। यूपी में बीजेपी 34 सीटों पर सिमट गई थी और सपा ने 37 सीटों पर बाजी मार ली थी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में फिर से राजपूतों की लामबंदी हो रही है। इस लामबंदी में बृजभूषण शरण सिंह और पूरन सिंह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देखने की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच और अयोध्या में अच्छा खासा प्रभाव है। जब योगी आदित्यनाथ यूजीसी एक्ट के खिलाफ राजपूतों का आक्रोश झेल रहे हैं। ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह की लामबंदी बीजेपी के दिक्कतें बढ़ा सकती है।

