चौराहे चौराहे बिक रहा है
अंबेडकर महान अंबेडकर महान ..
कहीं पूड़ी सब्जी तो
कही छोला चावल में
लुट रहा है अंबेडकर महान ..
कहीं नीला तो कहीं लाल
कहीं छोटा तो कहीं विशाल
बिक रहा है अंबेडकर महान ..
ब्राह्मणों का फिल्मी आंबेडकर
दलितों का भी अपना अंबेडकर
कहीं चुनावी तो कहीं
गुलाबी है अंबेडकर …
न समरसता है न स्वतंत्रता
न लोकतंत्र का पता है
न दिख रही है कोई समता ..
न संविधान का ज्ञान ..
हर तरफ हो रहा है
चुनावी गुणगान ..
अंबेडकर महान अंबेडकर महान ..
चौराहे चौराहे बिक रहा है
अंबेडकर महान अंबेडकर महान ..
केएम भाई

