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किसान संघर्ष समिति की 345वीं किसान पंचायत संपन्न

पंजाब के किसानों की ऐतिहासिक जीत पर किसान नेताओं ने बधाई दी

12 अक्टूबर को करनाल से निर्णायक संघर्ष का ऐलान करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

कर्नाटक सरकार किसानों के खिलाफ बिल्डर लॉबी के पक्ष में कार्य कर रही है

3 अक्टूबर 26 को लखीमपुर खीरी के शहीद शहीदों की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

आगामी विधान सभा चुनावों में किसान विरोधी सरकारों और पार्टियों को हराएं किसान

किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 345 वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। पंचायत में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने एमएसपी@सी2+50% पर खरीद की कानूनी गारंटी और संपूर्ण कर्जामुक्ति, भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने, पंजाब में किसानों की बड़ी जीत, संयुक्त किसान मोर्चा का प्रदेश सम्मेलन, 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के शहीदों का स्मृति दिवस, 12 अक्टूबर को SKM की करनाल (हरियाणा) बैठक सहित अनेक मुद्दों पर चर्चा की गई।
किसान पंचायत को महाराष्ट्र से किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो सुशीला ताई मोराळे, पंजाब से महिला किसान यूनियन की राजविंदर कौर राजू, पंजाब किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव गुरनामसिंह भिक्की, हरियाणा से अ भा कि सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, कर्नाटक से कर्नाटक प्रांत रैयत संघ के राज्य महासचिव टी यशवंत, छत्तीसगढ़ से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, रीवा म प्र से किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव एड शिवसिंह, प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंखू, इंदौर से मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, सिवनी से संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक डी डी वासनिक, भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, रायसेन से किसान संगठन के अध्यक्ष मुकेश धाकड़, नर्मदापुरम से किसान आदिवासी संगठन के अध्यक्ष फागराम, सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर, ग्वालियर से किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव शत्रुघ्न यादव आदि ने संबोधित किया।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि 12 अक्टूबर को संयुक्त किसान मोर्चा की जनरल बॉडी की बैठक में आगामी संघर्ष की रणनीति पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
डॉ सुनीलम ने बताया कि देशभर के आंदोलनकारियों की बैठक 10 और 11 अक्टूबर 26 को लखनऊ में आयोजित की गई है।
उन्होंने कहा कि किसानों को भा ज पा की डबल इंजन
की किसान मजदूर विरोधी सरकारों को हराने के लिए खुलकर काम करना चाहिए।
प्रो सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि बड़े पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के ऋण एवं अन्य सुविधाओं के मामलों में सरकार द्वारा राहत दी जाती है।
उन्होंने कहा कि किसान कर्ज में डूबा हुआ है और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, बिजली, डीजल और मजदूरी का खर्च बढ़ने के बावजूद किसान को अपनी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों को किसी की कृपा या भीख नहीं चाहिए, बल्कि अपनी मेहनत का उचित मूल्य और अपना अधिकार चाहिए।
राजविंदर कौर राजू ने कहा कि पंजाब के किसान भविष्य में भी संयुक्त किसान मोर्चा के प्रत्येक संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। 26 नवंबर को प्रस्तावित आंदोलन में दिल्ली की ओर कूच करना हो अथवा देशभर में विकेंद्रीकृत आंदोलन चलाना हो, पंजाब के किसान पूरी ताकत से भागीदारी करेंगे।
कां इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों के बीच किसी तरह का विवाद या विभाजन पैदा करना संयुक्त किसान मोर्चा का उद्देश्य नहीं है। मांग केवल इतनी है कि पंजाब के पास उपलब्ध पानी और विभिन्न राज्यों को दिए जा रहे पानी का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए तथा भविष्य में पानी का बंटवारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य रिपेरियन कानून के अनुसार हो।
गुरनामसिंह भिक्की ने बताया कि चंडीगढ़ में किसानों के आंदोलन के दौरान पंजाब सरकार के मंत्री को किसानों के मांग-पत्र पर सहमति जतानी पड़ी। पंजाब सरकार ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार से संबंधित मांगों को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा तथा पंजाब सरकार से संबंधित मांगों के समाधान के लिए समितियां गठित कर कार्रवाई की जाएगी।
टी यशवंत ने कर्नाटक में लगभग 9,000 एकड़ भूमि से जुड़े प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में न्यायपालिका के निर्णयों का सम्मान नहीं किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बिल्डर लॉबी के पक्ष में तथा किसानों के खिलाफ खड़ी दिखाई दे रही है। पूर्व में कर्नाटक में एयरपोर्ट विस्तार के लिए 13 गांवों की जमीन लेने के प्रयास का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के एकजुट संघर्ष के चलते उस परियोजना को रद्द कराने में सफलता मिली थी।
तेजराम विद्रोही ने कहा कि देशभर में किसानों की जमीन, फसल के उचित दाम और किसान अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष लगातार जारी है।
एड शिवसिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने आंदोलन के दौरान किसानों को लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद किसानों की प्रमुख मांगों का समाधान नहीं हुआ। किसानों को वादे नहीं, फसलों का उचित मूल्य चाहिए।
किसान पंचायत में मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे किसान नेताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार भले कितने ही किसान हितैषी दावे करे लेकिन किसानों का हित नहीं सध रहा है ना तो दूध के भाव मिल रहे हैं और ना ही गन्ने, सोयाबीन और अन्य फसलों के। लगातार बारिश से तीसरे साल भी सोयाबीन की फसल खराब हो चुकी है और किसान अब सोयाबीन बोने से बचने लगा है। मध्य प्रदेश का सोयाबीन का तमगा खतरे में है। वक्ताओं ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ तथा लाभकारी मूल्य तथा एमएसपी की गारंटी को लेकर एकजुट संघर्ष की जरूरत बताई ।
कार्यक्रम का लाइव प्रसारण बहुजन संवाद यूट्यूब चैनल एवं फेसबुक पेज पर किया गया।

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