डिफेंस कॉरिडोर का नक्शा: कहां-कहां बनेंगे प्लांट?
जिला/स्थानमुख्य उत्पादनराजगीर (नालंदा)155mm तोप के गोले (बड़े-बड़े आर्टिलरी शेल्स), पहले से स्वीकृत ऑर्डनेंस फैक्ट्रीगयाTNT, RDX जैसे विस्फोटक (बारूद), रॉकेट/मिसाइल प्रोपेलेंट (ईंधन)औरंगाबादहथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक; AK-203 राइफल, इंसास राइफल, हैंड ग्रेनेडरोहतास (सासाराम-डेहरी)हथियारों का हब: बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, रॉकेट लॉन्चर पार्ट्सबक्सरनया ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड प्लांट; 105mm/130mm तोप के गोलेभोजपुर (आरा)छोटे हथियार, पार्ट्स; बुलेटप्रूफ गाड़ियां (लाइट आर्मर्ड व्हीकल)वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहरड्रोन (सर्विलांस), इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स: कैमरा, बैटरी, रडार, नाइट विजन डिवाइसपटना (बिहटा)नया एयरपोर्ट, डिफेंस टाउनशिप; सेमीकंडक्टर फैक्ट्री (चिप्स: मोबाइल/मिसाइल के लिए)अन्यसैनिक यूनिफॉर्म, जूते, मेडिकल किट; MSME पार्क हर जिले में छोटे कारखानों के लिए
ये प्लांट रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेंगे, खासकर सीमा पर तनाव के समय। उदाहरण के लिए, 155mm गोले और RDX जैसे विस्फोटक सीधे आर्टिलरी और मिसाइलों में इस्तेमाल होंगे, जो पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक महत्व रखते हैं।

