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हिंद मेडिकल कॉलेज में ट्रस्ट की जंग! डॉ. रिचा मिश्रा ने लगाए गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) में ट्रस्ट की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। एक तरफ सरोजनी वर्मा और उनके बेटे विकास की ओर से ट्रस्ट की पूर्व चेयरपर्सन रहीं रिचा मिश्रा और डॉक्टर सचान पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं, दूसरी तरफ अब रिचा मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों पर जोरदार पलटवार किया है. रिचा मिश्रा ने ट्रस्ट की संरचना से लेकर मीटिंग, इस्तीफे, कोर्ट के आदेश, पुलिस शिकायतों और संस्थान के संचालन को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग संस्थान में जबरन दखल देकर माहौल खराब कर रहे हैं।

हालांकि, इस पूरी लड़ाई के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर ट्रस्ट की जंग इसी तरह चलती रही तो हजारों मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों का क्या होगा? आखिर हिंद इंस्टीट्यूट में विवाद की असली वजह क्या है? किसके पास ट्रस्ट चलाने का अधिकार है? और रिचा मिश्रा ने अपने बचाव में क्या-क्या दावे किए हैं?

रिचा मिश्रा ने मामले में क्या-क्या बताया?

 

रिचा मिश्रा के मुताबिक हिंद इंस्टीट्यूट से जुड़े ट्रस्ट में शुरुआत में कुल सात ट्रस्टी थे। उनका दावा है कि इनमें से दो ट्रस्टियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि दो ट्रस्टी इस्तीफा दे चुके हैं और अब केवल तीन ट्रस्टी बचे हैं. रिचा मिश्रा का कहना है कि साल 2004 में जब सभी ट्रस्टी मौजूद थे, तभी उन्हें और डॉक्टर सचान को ट्रस्ट के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी. उनके मुताबिक इसी व्यवस्था के तहत वर्षों तक संस्थान का संचालन होता रहा और इस दौरान किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी।

रिचा मिश्रा ने दावा किया कि पिछले वर्षों में हिंद इंस्टीट्यूट ने लगातार विस्तार किया है। उनके मुताबिक मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ बीएससी नर्सिंग, जीएनएम नर्सिंग, फार्मेसी और एमएससी नर्सिंग जैसे कई पाठ्यक्रम शुरू किए गए. उनका दावा है कि संस्थान में करीब तीन हजार छात्र पढ़ रहे हैं और अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं. रिचा मिश्रा ने कैंसर सेंटर और अत्याधुनिक कैंसर मशीन लगाए जाने का भी जिक्र किया. इस तरह संस्थान लगातार प्रगति की ओर बढ़ रहा था।

 

रिचा का दावा- ट्रस्ट हड़पने की रची गई साजिश

 

रिचा मिश्रा ने आरोप लगाया कि करीब दो वर्ष पहले बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को संस्थान में CEO का पद दिया गया। उनके मुताबिक इसी व्यक्ति ने डॉक्टर सचान का विश्वास हासिल करने के बाद कुछ दस्तावेजों को लेकर ऐसी रणनीति बनाई, जिससे ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन की कोशिश शुरू हुई. रिचा मिश्रा का दावा है कि इसी दौरान मानवेन्द्र सिंह को चेयरमैन बनाए जाने की बात कही गई और डॉक्टर सचान को हटाने के लिए रास्ता तैयार किया गया. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

रिचा मिश्रा ने 16 जनवरी और 3 फरवरी को हुई बैठकों का जिक्र किया। उनका कहना है कि 3 फरवरी की बैठक में वो खुद मौजूद थीं और वहां डॉक्टर सचान के खिलाफ FIR और उन्हें हटाने से जुड़े प्रस्ताव की जानकारी मिली. उनका आरोप है कि बैठक में कुछ ऐसे ट्रस्टियों को उपस्थित दिखाया गया, जो कथित तौर पर वहां मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि बाद में उन ट्रस्टियों ने लिखकर दिया कि वो बैठक में शामिल नहीं हुए थे।

 

रिचा ने उठाए दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल

 

रिचा मिश्रा ने इसी आधार पर दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं. रिचा मिश्रा ने सरोजनी वर्मा के पति सुनील वर्मा का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक सुनील वर्मा ट्रस्टी थे और वर्ष 2012 में उनका निधन हो गया था. ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक किसी ट्रस्टी की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिसों की सहमति और आवेदन की प्रक्रिया जरूरी है। उनका दावा है कि वर्ष 2012 के बाद से अब तक परिवार की तरफ से ट्रस्ट में ऐसा कोई आवेदन नहीं किया गया. इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि सरोजनी वर्मा वर्तमान में ट्रस्टी नहीं हैं .
ट्रस्ट का विवाद पहुंचा कोर्ट
हालांकि, ट्रस्ट के दस्तावेज और कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया से ही होगा. ट्रस्ट का विवाद अब कोर्ट तक पहुंच चुका है. रिचा मिश्रा के मुताबिक पहले परिसर में कुछ लोगों के प्रवेश को लेकर कोर्ट से आदेश मिले थे. इसके बाद दूसरी अदालत में मामला पहुंचा और उनके अनुसार कोर्ट ने मामले के विचाराधीन रहने तक संबंधित लोगों को ट्रस्टी होने के दावे के आधार पर परिसर में आने की अनुमति दी. यानी मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और इसी वजह से हिंद इंस्टीट्यूट में ट्रस्ट के अधिकार को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है।

 

अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप

 

रिचा मिश्रा ने कुछ लोगों पर संस्थान परिसर में हंगामा करने और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने विशेष रूप से नर्सिंग की छात्राओं और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का दावा किया। रिचा मिश्रा के मुताबिक इस संबंध में पुलिस, CO और थाने में कई शिकायतें दी गई हैं. उन्होंने कॉलेज के प्रिंसिपल से कथित बदसलूकी और उनकी महिला PS के साथ कथित अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

 

 

अस्पताल के सॉफ्टवेयर पर सवाल

 

विवाद के बीच रिचा मिश्रा ने अस्पताल के सॉफ्टवेयर को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उनका दावा है कि संस्थान में कुछ लोगों ने अस्पताल के सॉफ्टवेयर सिस्टम से जुड़े तार काट दिए. इसके बाद करीब एक सप्ताह तक सॉफ्टवेयर के कामकाज में परेशानी आई. अगर यह दावे जांच में सही साबित होते हैं तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है क्योंकि अस्पताल का डिजिटल सिस्टम प्रभावित होने का सीधा असर मरीजों के रिकॉर्ड और अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ सकता है।

 

बैंक खातों को फ्रीज करने से बढ़ी परेशानी

 

रिचा मिश्रा ने संस्थान के बैंक खातों को लेकर भी बड़ा दावा किया. उनके मुताबिक कुछ खातों को फ्रीज किए जाने के कारण कर्मचारियों को सैलरी निकालने में परेशानी आ रही है. उनका कहना है कि संस्थान में डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं और सभी को वेतन देना जरूरी है. खातों को  इसी वजह से फ्रीज होने के कारण फिलहाल कैश के जरिए भुगतान किया जा रहा है।

हालांकि, इस पूरे मामले में बैंकिंग रिकॉर्ड और कानूनी आदेश महत्वपूर्ण हो सकते हैं. अब इस पूरी लड़ाई का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रस्ट की जंग अपनी जगह है, लेकिन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का क्या? यहां मेडिकल छात्र पढ़ रहे हैं. यहां डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. कर्मचारी काम कर रहे हैं और अगर प्रबंधन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता है, तो इसका असर संस्थान की व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है. ऐसे में अब जरूरत है कि विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के जरिए जल्द हो और छात्रों तथा मरीजों की व्यवस्था किसी भी कीमत पर प्रभावित न हो।

 

 

जांच के बाद ही सामने आ सकेगी सच्चाई

 

 

हिंद इंस्टीट्यूट की कहानी फिलहाल आरोप और पलटवार के बीच खड़ी है. एक पक्ष गंभीर आरोप लगा रहा है और दूसरा पक्ष आरोपों को खारिज करते हुए खुद कई गंभीर सवाल उठा रहा है, लेकिन कौन सही है? किसके पास ट्रस्ट चलाने का वैध अधिकार है? कौन से दस्तावेज सही हैं? क्या पुलिस शिकायतों पर कार्रवाई हुई? क्या अस्पताल की व्यवस्था वास्तव में प्रभावित हो रही है? और सबसे बड़ा सवाल कि क्या ट्रस्ट की इस लड़ाई का खामियाजा मेडिकल कॉलेज के छात्रों और अस्पताल में आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ेगा? इन सभी सवालों का अंतिम जवाब जांच, दस्तावेजों और अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आ सकेगा. फिलहाल हिंद इंस्टीट्यूट में विवाद जारी है और नजर अब इस बात पर है कि कानून की लड़ाई में बाजी किसके हाथ लगती है।

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