उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार की अखिलेश यादव से नाराजगी कोई नई बात नहीं है। 2025 में यह तनाव और गहरा गया है, खासकर आजम खान की रिहाई के बाद। जेल से बाहर आने के बाद उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम ने अखिलेश से मुलाकात नहीं की, जबकि दिसंबर 2024 में आजम ने जेल से एक चिट्ठी भेजकर इंडिया गठबंधन (जिसमें सपा प्रमुख भूमिका में है) पर रामपुर में “दमन” का आरोप लगाया। यह चिट्ठी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधा संदेश मानी जा रही है। सपा के मुस्लिम नेताओं ने भी आजम परिवार से दूरी बना ली है, जिससे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा के लिए यादव-मुस्लिम समीकरण पर खतरा मंडरा रहा है।
नाराजगी के मुख्य कारण
जेल में उपेक्षा: आजम खान फरवरी 2020 से सीतापुर जेल में हैं। सपा ने उनकी रिहाई के लिए कोई बड़ा आंदोलन या प्रयास नहीं किया। अप्रैल 2025 में आजम की रिहाई पर अखिलेश ने गर्मजोशी दिखाई, लेकिन अब्दुल्लाह आजम की फरवरी 2025 रिहाई पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
परिवार की राजनीतिक अनदेखी: कुंदरकी उपचुनाव (नवंबर 2024) में सपा ने मोहिबुल्लाह नदवी को टिकट दिया, जबकि आजम परिवार (पठान समुदाय) उम्मीद कर रहा था। इससे मुस्लिम वोटबैंक में असंतोष बढ़ा।
मीडिया प्रभारी का बयान: आजम के मीडिया प्रभारी फसाहत खान शानू ने अप्रैल 2022 में कहा था कि अखिलेश “हमारे कपड़ों से बदबू आने” का आरोप लगाते हैं और जेल से बाहर नहीं आने देना चाहते। यह नाराजगी 2025 में भी कायम है।
परिवार का बयान: जून 2025 में आजम की पत्नी तजीन फातिमा ने जेल मुलाकात के बाद कहा, “अब अल्लाह से उम्मीद है,” जो सपा से निराशा का संकेत था। अखिलेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर असहज प्रतिक्रिया दी।
सपा छोड़ने की अटकलें
नई पार्टी की संभावना: मार्च 2025 में सियासी गलियारों में खबरें आईं कि आजम खान योगी सरकार से “राहत” (केस वापसी) के बदले सपा छोड़ सकते हैं और नई पार्टी बना सकते हैं। इसे “यूपी का ओवैसी” मॉडल बताया जा रहा है, जो मुस्लिम वोटों को बांट सकता है। सितंबर 2025 के एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में दावा किया गया कि आजम नई पार्टी बनाएंगे, जिससे सपा में हड़कंप मच गया।
पिछले उदाहरण: 2017-2022 के बीच भी आजम की नाराजगी चरम पर थी। शिवपाल यादव (अखिलेश के चाचा) ने अप्रैल 2022 में आजम से मुलाकात की, जिससे सपा में बेचैनी फैली। आजम ने कहा था, “बीजेपी, बसपा या कांग्रेस कोई बड़ा सवाल नहीं।”
कहां जा सकते हैं आजम परिवार? बसपा या कांग्रेस?
सपा छोड़ने पर आजम परिवार के सामने मुख्य विकल्प बसपा और कांग्रेस ही हैं, क्योंकि ये दल मुस्लिम वोटबैंक पर फोकस करते हैं। नीचे तुलना:
पार्टीसंभावनाकारणहाल की घटनाएंबसपाकम (लेकिन संभव)- मायावती ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है (जैसे कुंदरकी में रफतुल्लाह)।
– आजम का पुराना कनेक्शन: 1990s में बसपा से जुड़े रहे।
– लेकिन बसपा का वोटबैंक दलित-मुस्लिम है, और आजम की छवि विवादास्पद।- नवंबर 2024 उपचुनाव में बसपा ने 2 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे।
– अगर आजम जॉइन करें, तो पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट मजबूत हो सकता है।कांग्रेसज्यादा- कांग्रेस ने आजम परिवार से संपर्क बढ़ाया। अप्रैल 2025 में सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस आजम को “साथ लाने” की कोशिश में है।
– इमरान मसूद (कांग्रेस सांसद) ने आजम को “गार्जियन” कहा।
– राहुल-प्रियंका ने संभल में मुस्लिम वोट साधने की कोशिश की।- दिसंबर 2024 में अजय राय (कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष) जेल गए।
– जून 2025 में तजीन फातिमा ने कांग्रेस से “उम्मीद” जताई।
– कांग्रेस यूपी में अस्तित्व बचाने के लिए मुस्लिम लीडर्स चाहती है।
अन्य विकल्प: चंद्रशेखर आजाद (आजाद समाज पार्टी) ने नवंबर 2024 में अब्दुल्लाह से जेल में मुलाकात की और कहा, “सड़क से संसद तक लड़ेंगे।” ओवैसी (AIMIM) भी संपर्क में हैं, लेकिन ये छोटे दल हैं।
इस नेता से हुई बात?
आपके सवाल का आखिरी हिस्सा “इस नेता से हुई बात” संभवतः हाल की किसी मुलाकात का जिक्र है। सितंबर 2025 की एक्स रिपोर्ट्स के मुताबिक, आजम परिवार के संपर्क में चंद्रशेखर आजाद हैं, जिनसे जेल मुलाकात हुई। नवंबर 2024 में चंद्रशेखर हरदोई जेल गए और अब्दुल्लाह से बोले, “आप अकेले नहीं, हम साथ लड़ेंगे।” यह मुलाकात अखिलेश के रामपुर दौरे से ठीक पहले हुई, जिससे सपा में बेचैनी बढ़ी। कुछ रिपोर्ट्स में शिवपाल यादव का भी जिक्र है, लेकिन हालिया फोकस चंद्रशेखर पर है।
निष्कर्ष
आजम परिवार सपा में ही रह सकता है अगर अखिलेश माफी मांगें या टिकट दें, लेकिन नाराजगी गहरी है। कांग्रेस ज्यादा संभावित लग रही, क्योंकि वह मुस्लिम वोटों के लिए बेताब है। बसपा पुरानी दुश्मनी (2019 गठबंधन टूटा) के कारण कम चांस। 2027 चुनाव से पहले यह ड्रामा सपा के लिए बड़ा संकट है। अगर आजम नई पार्टी बनाते हैं, तो पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोट बंटेगा, जो भाजपा को फायदा देगा। सियासत में कुछ भी हो सकता है—अभी तो चिट्ठियां और मुलाकातें ही चल रही हैं।

