ऋषी तिवारी
नई दिल्ली। देश में लगातार सामने आ रही परीक्षा प्रक्रियाओं की खामियों और नीट (NEET) परीक्षा में पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं के बीच, आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के आप पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। एक वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आज भारत को एक ऐसा प्रधानमंत्री की सख्त जरूरत है, जो स्वयं शिक्षित हो और शिक्षा जगत की जटिलताओं को गहराई से समझे।
अरविंद केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में छात्र शिक्षा माफिया और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। जिसमें अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और इससे निपटने के लिए सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता का भी अभाव है।
एयरफोर्स और बुलेटप्रूफ वाहन
केंद्र सरकार की ओर से हाल में की गई उस घोषणा पर जहां बड़ी चर्चा हो रही है तो वहीं अरविंद केजरीवाल ने उसकी व्यावहारिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने कहा था कि भविष्य में नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों और बुलेटप्रूफ वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
अरविंद केजरीवाल ने इस पहल को ‘प्रतीकात्मक’ और लापरवाह बताते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी समस्याओं का समाधान प्रश्नपत्रों को एयरलिफ्ट करने से नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद छेदों को भरने से होगा। सरकार यह तय करने पर ध्यान नहीं दे रही है कि पेपर आखिर किस स्तर पर लीक हो रहे हैं। क्या वे सड़क पर लीक होते हैं या फिर उन्हें बनाने वाले स्तर पर?” उनका कहना है कि अगर सिस्टम के अंदर बैठे लोग ही भ्रष्ट हैं, तो चाहे आप पेपर को बुलेटप्रूफ जीप में रखकर ले जाएं या फाइटर जेट से, लीक रुकेगी नहीं। यह कदम सरकार की नाकामी को छिपाने का एक जुमला भर है।
शिक्षा व्यवस्था माफिया के चंगुल में
अरविंद केजरीवाल अपने वीडियो संदेश में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पेपर लीक होता है, तो उसका सीधा असर उन मेहनती छात्रों पर पड़ता है जो सालों से दिन-रात एक करके तैयारी करते हैं। यह माफिया छात्रों के हक मारता है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। केजरीवाल ने सवालिया निशान लगाया कि जब तक सरकार इस माफिया के आला अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक कोई भी उपाय असफल साबित होगा। उनका मानना है कि सरकार की मंशा वास्तव में समस्या का समाधान करने की नहीं है, बल्कि वह घोषणाओं के जरिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है।
प्रशासन की कठोरता पर सवाल
केजरीवाल ने कहा कि एक छात्र ने जब सिस्टम की गलती को उजागर किया, तो उसे सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिकायतकर्ता पर ही सवाल उठाए जाते हैं, सिस्टम पर नहीं। उन्होंने केंद्र और परीक्षा आयोजक एजेंसियों से मांग की कि किसी भी छात्र की शिकायत को नजरअंदाज करने या उसे दबाने के बजाय, उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन स्वयं छात्रों को न्याय नहीं देगा, तो छात्रों का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।
अपने संदेश के दौरान केजरीवाल ने सबसे मजबूत और विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि समय की मांग है कि देश का प्रधानमंत्री शिक्षित हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक ऐसा विषय है जिसे सतही जानकारी से नहीं, बल्कि गहरी समझ के साथ संभाला जाना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल कहा कि जब देश की शिक्षा व्यवस्था खतरे में हो और परीक्षाओं का अस्तित्व सवालों के घेरे में हो, तो हमें एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो शिक्षा के महत्व को समझे। एक पढ़ा-लिखा प्रधानमंत्री इस बात को बेहतर ढंग से समझ सकता है कि एक पेपर लीक किसी गरीब घर के छात्र के सपनों को कैसे चकनाचूर कर देता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने वाली मानी जा रही है, जिन्हें अक्सर विपक्षी दल शिक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे जटिल मुद्दों पर असंवेदनशील बताते रहे हैं।

