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आराधना मिश्रा ‘मोना’: विधायक से यूपी कांग्रेस अध्यक्ष तक का सफर!

कांग्रेस ने बनाया है प्रदेश अध्यक्ष, प्रतापगढ़ के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं मोना

शिवानी पाल 
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनका राजनीतिक सफर सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे संगठन, विधानसभा और पार्टी नेतृत्व तक पहुंचता है। ऐसा ही एक नाम है आराधना मिश्रा ’। प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुकीं आराधना मिश्रा अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई और बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। 2 अक्टूबर को कांग्रेस ने आराधना मिश्रा  को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने अजय राय की जगह ली है। इसी संगठनात्मक बदलाव में सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि चौधरी वीरेंद्र सिंह को विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिर आराधना मिश्रा कौन हैं?
कहां से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर?
किस परिवार से आती हैं आराधना मिश्रा?
रामपुर खास में उनकी लगातार जीत का सिलसिला कैसे बना?
और एक ऐसी पार्टी, जिसके उत्तर प्रदेश में विधानसभा सदस्यों की संख्या बहुत सीमित है, उसकी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके कंधों पर क्यों डाली गई?
आज की इस वीडियो में हम जानेंगे आराधना मिश्रा  जिनको मोना मिश्रा के नाम से भी जाना जाता | ‘उनकी  जिंदगी, परिवार, शिक्षा, राजनीतिक सफर, चुनावी रिकॉर्ड, विधानसभा में भूमिका और यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनने तक की पूरी कहानी। आराधना मिश्रा  का जन्म 20 अप्रैल 1974 को इलाहाबाद, यानी आज के प्रयागराज में हुआ था। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक उनके पिता का नाम प्रमोद तिवारी है। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय तक रामपुर खास विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। आराधना मिश्रा की आधिकारिक विधानसभा प्रोफाइल में उनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक दर्ज है और उनकी विशेष रुचि समाज सेवा बताई गई है।उनका विवाह 2 दिसंबर 1999 को अम्बिका मिश्र से हुआ। विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार उनके एक बेटा और एक बेटी हैं।यानी आराधना मिश्रा की निजी जिंदगी की एक तरफ पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि है, तो दूसरी तरफ उनके परिवार का लंबा राजनीतिक इतिहास भी है।
राजनीतिक परिवार में जन्म, लेकिन अपनी राजनीतिक पहचान आराधना मिश्रा के राजनीतिक सफर को समझने के लिए उनके पिता प्रमोद तिवारी की राजनीतिक पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है।प्रमोद तिवारी रामपुर खास की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रहे हैं और कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि आराधना मिश्रा को राजनीति का माहौल बचपन से ही मिला।लेकिन उनकी कहानी सिर्फ राजनीतिक परिवार की बेटी होने तक सीमित नहीं है।रिपोर्टों के मुताबिक वह 2000 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़ी हुई थीं और चुनावी राजनीति में आने से पहले संगठन तथा सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस की मीडिया अभियान समिति में भी काम किया था। यानी सक्रिय चुनावी राजनीति में आने से पहले भी उनका कांग्रेस संगठन से जुड़ाव था।
और फिर आया साल 2014। पहली बार विधानसभा पहुंचने की शुरुआत
साल 2013-14 में प्रमोद तिवारी के राज्यसभा जाने के बाद रामपुर खास विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ।कांग्रेस ने इस उप चुनाव में आराधना मिश्रा को उम्मीदवार बनाया।यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था। और परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आया। आराधना मिश्रा ने 2014 के रामपुर खास उपचुनाव में 94,076 वोट हासिल किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 26,397 वोट मिले।उनकी जीत का अंतर 67,679 वोट रहा। इस जीत के साथ आराधना मिश्रा पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचीं।लेकिन असली चुनौती अब शुरू होनी थी। क्योंकि उपचुनाव जीतना एक बात है और आम विधानसभा चुनाव में अपना राजनीतिक आधार बनाए रखना दूसरी बात।2017: राजनीतिक परीक्षा और दूसरी जीत | इसके बाद आया 2017 का
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव।
उस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी का प्रभाव काफी मजबूत था।ऐसे राजनीतिक माहौल में रामपुर खास से आराधना मिश्रा एक बार फिर कांग्रेस की उम्मीदवार बनीं।और उन्होंने फिर जीत दर्ज की।2017 के चुनाव में आराधना मिश्रा को 81,463 वोट मिले और उन्होंने बीजेपी के नागेश प्रताप सिंह को17,066 वोटों से हराया। उनका वोट शेयर करीब 47.74 प्रतिशत रहा।इस जीत ने यह दिखाया कि 2014 की जीत केवल उपचुनाव तक सीमित नहीं थी।
आराधना मिश्रा ने रामपुर खास में अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखी।
2022: तीसरी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड
अब बात करते हैं 2022 के विधानसभा चुनाव की।
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुकाबला था।
कांग्रेस राज्य में बेहद सीमित सीटों पर रह गई, लेकिन रामपुर खास में आराधना मिश्रा ने अपनी सीट बचाए रखी।2022 में उन्होंने 84,334 वोट हासिल किए।उनका वोट शेयर करीब 50.27 प्रतिशत रहा और उन्होंने बीजेपी के नागेश प्रताप सिंह को 14,741 वोटों से हराया।इस तरह आराधना मिश्रा लगातार तीसरी बार रामपुर खास से विधायक बनीं।2014 में उपचुनाव से शुरू हुआ सफर—2014 जीत,2017 जीत,और 2022 में तीसरी जीत।
यानी रामपुर खास उनकी राजनीति का सबसे मजबूत आधार बन गया।विधानसभा में कांग्रेस की प्रमुख आवाज 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद आराधना मिश्रा की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई।वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता बनीं।यानी विधानसभा में कांग्रेस की ओर से सरकार और विपक्षी राजनीति से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने की जिम्मेदारी उनके पास रही। PRS Legislative Research के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 10 मार्च 2022 से 5 मार्च 2025 तक की अवधि में विधानसभा में उनकी उपस्थिति 95.1 प्रतिशत रही।इसी अवधि में उनके नाम 30 प्रश्न दर्ज हैं। यह आंकड़े उनके विधानसभा कार्यकाल की संसदीय गतिविधियों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हैं।इस दौरान आराधना मिश्रा का राजनीतिक प्रोफाइल रामपुर खास की विधायक से आगे बढ़कर प्रदेश स्तर की कांग्रेस नेता के रूप में दिखाई देने लगा।प्रियंका गांधी के साथ राजनीतिक भूमिका आराधना मिश्रा के राजनीतिक सफर में प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ उनकी भूमिका का भी उल्लेख मिलता है।कई रिपोर्टों के मुताबिक वह प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस के अभियानों में काम करती रही हैं।2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने महिलाओं पर केंद्रित ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान चलाया था और आराधना मिश्रा ने इस अभियान में भी भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महिला और संगठनात्मक नेतृत्व के महत्वपूर्ण चेहरों में गिना जाने लगा।रामपुर खास क्यों है आराधना मिश्रा के लिए खास?
आराधना मिश्रा की राजनीतिक कहानी में रामपुर खास विधानसभा सीट सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है।यह सीट सिर्फ उनका चुनावी क्षेत्र नहीं है, बल्कि उनके परिवार की लंबे समय से जुड़ी राजनीतिक जमीन भी है।उनके पिता प्रमोद तिवारी ने यहां लंबे समय तक कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया।इसके बाद आराधना मिश्रा ने 2014 में इस सीट से चुनावी राजनीति शुरू की।और फिर 2017 तथा 2022 में लगातार जीत दर्ज की।इस तरह पिता की राजनीतिक विरासत से जुड़े क्षेत्र में आराधना मिश्रा ने अपनी अलग पहचान बनाई।2022 की जीत के बाद वह रामपुर खास से लगातार तीसरी बार विधायक बनीं।
2026: राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़
अब आते हैं आराधना मिश्रा के राजनीतिक करियर के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर।2 अक्टूबर 2026। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया।पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।उन्होंने अजय राय की जगह ली।इसके साथ ही सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।वहीं चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया गया।इस नियुक्ति के साथ आराधना मिश्रा की जिम्मेदारी अचानक काफी बड़ी हो गई।अब उन्हें केवल अपनी विधानसभा सीट नहीं संभालनी है।
अब जिम्मेदारी है—पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को संभालने की। 2027 चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष ऐसे समय में बनाया गया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं।ऐसे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सामने कई संगठनात्मक और राजनीतिक सवाल होंगे।पार्टी का संगठन किस तरह मजबूत किया जाए?जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को कैसे सक्रिय किया जाए?कांग्रेस की राजनीतिक मौजूदगी को कैसे बढ़ाया जाए?और अगर गठबंधन की राजनीति आगे बढ़ती है तो सहयोगी दलों के साथ सीटों और रणनीति पर किस तरह बातचीत की जाए?ये सभी सवाल आने वाले समय में आराधना मिश्रा की नई भूमिका का हिस्सा होंगे।
हाल की रिपोर्टों में उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने को कांग्रेस की 2027 की चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक पुनर्गठन से जोड़कर देखा गया है। संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन कांग्रेस के इस नए संगठनात्मक ढांचे में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व भी दिखाई देता है।आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। देविंदर निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है।कांग्रेस के इस बदलाव को अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषकों ने सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक विस्तार के नजरिए से देखा है। हालांकि इन नियुक्तियों के राजनीतिक प्रभाव का वास्तविक आकलन चुनावी प्रक्रिया और आने वाले समय के प्रदर्शन के बाद ही किया जा सकेगा।आराधना मिश्रा की राजनीतिक शैली और पहचान
आराधना मिश्रा की राजनीतिक पहचान के कई पहलू हैं।
पहला—वह एक लंबे राजनीतिक इतिहास वाले कांग्रेस परिवार से आती हैं।
दूसरा—उन्होंने रामपुर खास से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते हैं।
तीसरा—वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता रह चुकी हैं।
चौथा—उन्हें संगठन और विधानसभा दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव है।
और पांचवां—अब उनके पास पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी है। यानी उनका राजनीतिक सफर एक स्थानीय विधानसभा सीट से शुरू होकर प्रदेश संगठन के शीर्ष पद तक पहुंचा है।
आराधना मिश्रा के सामने अब क्या चुनौती है?प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनकी सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव लड़ना नहीं होगी।उन्हें संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और उत्तर प्रदेश की अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस की भूमिका तय करने की चुनौती का सामना करना होगा।इसके अलावा सपा के साथ कांग्रेस के संबंध भी 2027 की राजनीति में महत्वपूर्ण रहेंगे।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की स्थिति, सीटों का बंटवारा और चुनावी रणनीति जैसे मुद्दे भी आने वाले महीनों में चर्चा का केंद्र रह सकते हैं।लेकिन इन सभी मामलों पर अंतिम तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।एक नजर में आराधना मिश्रा ‘मोना’ का राजनीतिक सफर अगर आराधना मिश्रा के पूरे राजनीतिक सफर को एक टाइमलाइन में समझें तो—
2000: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़ाव।
2012: कांग्रेस के मीडिया अभियान से जुड़ी भूमिका।
2014: रामपुर खास उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनीं।
2017: विधानसभा चुनाव जीतकर दूसरी बार विधायक बनीं।
2019 के बाद: उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की प्रमुख भूमिका।
2022: रामपुर खास से तीसरी बार विधायक बनीं।
2022 के बाद: उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता बनीं।
2026: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हुईं।

आराधना मिश्रा ‘ की कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसे सफर की कहानी है, जिसमें पारिवारिक राजनीतिक विरासत, लगातार चुनावी जीत, विधानसभा में नेतृत्व और अब प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी—ये सभी पड़ाव शामिल हैं।रामपुर खास से 2014 में शुरू हुआ उनका विधानसभा सफर 2017 और 2022 की जीत के साथ आगे बढ़ा।विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता बनने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और बड़ी हुई।और अब 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान मिल चुकी है।लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनका सबसे बड़ा अध्याय अभी शुरू हुआ है।क्योंकि अब सवाल रामपुर खास की एक सीट का नहीं है।सवाल है पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन और राजनीतिक भूमिका का।2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आराधना मिश्रा के सामने आने वाले महीने उनके राजनीतिक करियर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।क्या वह कांग्रेस संगठन को नई दिशा दे पाएंगी?
गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस की भूमिका किस तरह तय होगी?और 2027 के चुनाव में कांग्रेस की रणनीति क्या होगी?इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे।फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि—रामपुर खास की विधायक से उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तक पहुंचने वाली आराधना मिश्रा ‘मोना’ अब यूपी की राजनीति में अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद यूपी कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
मिलते हैं अगली वीडियो में, एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक कहानी के साथ।

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