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त्योहारों के मौसम में जनजीवन और व्यापार की रक्षा के लिए प्रदर्शन दिसंबर तक स्थगित करने की अपील

सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने राहुल गांधी एवं अभिजीत दीपके से संवाद के माध्यम से पहल करने का किया आग्रह

 

नई दिल्ली । इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण न्यास के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष  राहुल गांधी एवं  अभिजीत दीपके से अपील की है कि वर्तमान में चल रहे प्रदर्शनों के आयोजकों से संवाद कर त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनों को दिसंबर के अंत तक स्थगित करने की पहल करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनों को पूरी तरह स्थगित करना संभव न हो, तो उन्हें ऐसे स्थानों और तरीकों से आयोजित किया जाए, जिनसे बाजारों, यातायात और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि भारत में त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक उल्लास, पारिवारिक मिलन, सांस्कृतिक परंपराओं और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण अवसर हैं। नवरात्र, विजयादशमी और करवा चौथ के बाद धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ पूजा, कार्तिक पूर्णिमा तथा गुरु नानक जयंती जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान बाजारों में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए निकलते हैं। इसके बाद दिसंबर में भी अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसर आते हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के व्यापारी त्योहारों की तैयारी महीनों पहले से करते हैं। वे बड़ी मात्रा में माल खरीदते हैं, कर्मचारियों को काम देते हैं और दुकानों के किराये सहित अनेक खर्च वहन करते हैं। त्योहारों के मौसम में बाजारों तक लोगों की पहुँच बाधित होने, सड़कों पर अवरोध उत्पन्न होने अथवा यातायात प्रभावित होने से छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, श्रमिकों और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इस अधिकार के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है। किसी भी आंदोलन की सफलता का आकलन केवल उसकी आवाज से नहीं, बल्कि आम जनता के प्रति उसकी संवेदनशीलता से भी होना चाहिए। जनता की समस्याओं को उठाते हुए जनता को ही अनावश्यक परेशानी में डालना किसी भी आंदोलन के उद्देश्य को कमजोर कर सकता है।”

गुप्ता ने कहा कि यदि त्योहारों के पूरे मौसम में आम नागरिकों और व्यापारियों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो समाज के एक वर्ग में यह धारणा बन सकती है कि आंदोलन के आयोजक हिंदू त्योहारों और हिंदू समाज की खुशियों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। ऐसी धारणा उचित हो या अनुचित, उसका सामाजिक स्वीकार्यता और राजनीतिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अपील किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि आम नागरिकों, व्यापारियों, श्रमिकों और सामाजिक सद्भाव के हित में है। किसी भी आंदोलन की मांगों को संवाद और संवैधानिक तरीकों से सुना जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि सामान्य जनजीवन, बाजारों का कारोबार और लोगों की त्योहार मनाने की स्वतंत्रता प्रभावित न हो।

अंत में सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने श्री राहुल गांधी एवं श्री अभिजीत दीपके से आग्रह किया कि वे प्रदर्शनकारियों और संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर दिसंबर के अंत तक प्रदर्शनों को स्थगित करने अथवा उनके स्वरूप में आवश्यक परिवर्तन करने की सकारात्मक पहल करें, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान भी बना रहे और देशवासी अपने त्योहार शांति, उल्लास और सौहार्द के साथ मना सकें।

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