रैली के संयोजक राजकुमार भाटी का बढ़ा कद, चुनाव में हो सकते हैं स्टार प्रचारक!
गौतमबुद्धनगर के समीकरण बदलेंगे किसानों से किये गए वादे!
चरण सिंह
नई दिल्ली। दादरी में हुई समानता भाईचारा रैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सपा कार्यकर्ताओं में जोश भर गई। गौतमबुद्धनगर के किसानों से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस तरह से बड़े वादे किए उससे गौतमबुद्धनगर की राजनीति के समीकरण बदलने के आसार बने हैं। पार्टी को इस रैली से कितना फायदा होगा यह तो समय बताएगा पर व्यक्तिगत रूप से रैली के संयोजक राजकुमार भाटी का कद इस रैली से बढ़ा है। राजकुमार भाटी ने विभिन्न चैनलों पर डिबेट में विपक्ष का मजबूत पक्ष रखने के साथ ही जमीनी स्तर पर सपा को मजबूती दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास भरने का काम उन्होंने किया है। ऐसे में राजकुमार की सधी हुई भाषा का इस्तेमाल करने के लिए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उन्हें स्टार प्रचारक बनाया जा सकता है।
स्थानीय नेताओं को मंच पर जगह पर जगह मिलने पर रैली के बाद भले ही उनके दादरी से चुनाव लड़ने की चर्चा हो रही हो पर उनकी निगाहें राज्य सभा सीट पर है। ऐसे ही उनका कद इसी तरह से बढ़ता रहा तो देर सवेर राज्य सभा भी वह हासिल कर लेंगे। इस रैली की खासियत यह रही कि राजकुमार भाटी ने सपा कार्यकर्ताओं के मन से पुलिस प्रशासन का डर निकाला है। जिस तरह से उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पीडीए सभाएं की और शुरुआत दौरे में पुलिस प्रशासन ने कार्यक्रमों ने रोड़ा अटकाने की कोशिश की और राजकुमार भाटी ने पुलिस प्रसाशन का डटकर मुकाबला किया उससे सपा कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है।
राजकुमार भाटी बड़ी चतुराई से इस रैली की नियतंत्र अपने हाथ में रखा जिसको चाहा बुलावा जिसको चाहा एहसास कराया। सांसद धर्मेंद्र यादव, गौतमबुद्ध नगर जिलाध्यक्ष अध्यक्ष सुधीर भाटी का भाषण न होना और राहुल अवाना का मंच पर न चढ़ पाना रैली में चर्चा का विषय रहा।
राजकुमार भाटी बड़ी चतुराई से इस रैली की नियतंत्र अपने हाथ में रखा जिसको चाहा बुलावा जिसको चाहा एहसास कराया। सांसद धर्मेंद्र यादव, गौतमबुद्ध नगर जिलाध्यक्ष अध्यक्ष सुधीर भाटी का भाषण न होना और राहुल अवाना का मंच पर न चढ़ पाना रैली में चर्चा का विषय रहा।
दरअसल रैली में अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट समेत विकास परियोजनाओं में किसानों के साथ हुए कथित अन्याय का जिक्र किया और समाजवादी सरकार बनने पर किसानों की जमीन लेने पर बाजार दर से मुआवजा देने के वादा किया। इससे स्थानीय लोगों में सपा के प्रति रुझान बढ़ा है। रैली का फोकस सामाजिक न्याय, समानता, भाईचारा और पीडीए को मजबूत करने पर था। गुर्जर समुदाय को विशेष रूप से आकर्षित करने की कोशिश की गई। हालांकि शुरुआत में तो यह रैली गुर्जर समाज की ही मानी जा रही थी पर ज्यों ज्यों समय बीतता गया त्यों त्यों रैली समाजवादी सम्मेलन में बदलती गई।
उधर दूसरी ओर जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन के समय पीएम मोदी के भाषण के समय लोगों के उठकर जाने की भी खबरें हैं। खुद उत्तर प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स के भी खिसकने की बात सामने आ रही है। यह सपा के लिए अच्छी खबर है। रैली में सांसद इकरा हसन, हरेंद्र मलिक, रामजी लाल सुमन, विधायक अतुल प्रधान की उपस्थिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मजबूती को प्रदान कर रही थी।
दरअसल अखिलेश यादव ने इस बार पीडीए के दम पर सरकार बनाने में जुट गए हैं। उनको लग रहा है कि लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी सपा को पीडीए का साथ मिलेगा। यही वजह रही कि 30 जिलों की सभी विधानसभाओं के कार्यकर्ताओं को इस रैली में बुलाया गया था। उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि चुनाव को हिन्दू मुस्लिम बनाकर ही लड़ा जाए। यूजीसी एक्ट के चलते सवर्णों की नाराजगी भी योगी के लिए बड़ी चुनौती है। उप चुनाव में 10 में से 9 सीटें झटकने वाले योगी आदित्यनाथ नौकरशाही को ज्यादा बढ़ावा देने का खामियाजा इन चुनाव में भुगत सकते हैं।
दरअसल उत्तर प्रदेश के ब्यरोक्रेट्स बीजेपी कार्यकर्ताओं को तो छोड़ दीजिये विधायकों-सांसदों के साथ मंत्रियों को भी कुछ नहीं समझ रहे हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ पर मुखर हैं। इसका फायदा सपा को मिल सकता है। बीएसपी के कमजोर होने का फायदा भी सपा को मिलने की संभावना है। हालांकि सपा के आंदोलनों से बचने की नीति पार्टी पर भारी भी पड़ सकती है। सपा के संगठन में भी वह मजबूती नहीं है जो सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के समय हुआ करती थी।

