20 सितंबर को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले पर केंद्र सरकार को कड़ा घेरा। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “हमारी विदेश नीति फेल हो गई है।” यह बयान ट्रंप प्रशासन के उस नए प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन के बाद आया है, जिसमें H-1B वीजा आवेदनों पर कंपनियों को प्रतिवर्ष 100,000 डॉलर (लगभग 90 लाख रुपये) का शुल्क लगाने का ऐलान किया गया है। यह बदलाव 21 सितंबर 2025 से लागू होगा और मुख्य रूप से भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर के पेशेवरों को प्रभावित करेगा, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में 70% से अधिक भारतीय हैं।
अखिलेश यादव के मुख्य बिंदु
विदेश नीति की कमजोरी: “विदेश नीति कमजोर हो गई है। अमेरिका का यह कदम भारतीय युवाओं के लिए बड़ा झटका है, लेकिन सरकार ने कोई तैयारी नहीं की।”
निर्भरता का खतरा: उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अन्य देशों पर अत्यधिक निर्भर हो रहा है, जो राष्ट्रीय हितों के लिए घातक है। उन्होंने कहा, “यह आर्थिक मिसमैनेजमेंट का नतीजा है।”
उत्तर प्रदेश पर तंज: प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा, कहा कि “शिक्षा के बजाय हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है।”
प्रभाव: आईटी कंपनियां (जैसे इंफोसिस, टीसीएस) पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे भारतीय इंजीनियर्स की अमेरिका में नौकरियां मुश्किल हो जाएंगी।
पृष्ठभूमि: ट्रंप ने 2017 से ही H-1B पर सख्ती की बात की थी। राहुल गांधी ने 2017 में ही पीएम मोदी को ट्वीट कर आगाह किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विपक्ष का एकजुट हमला
अखिलेश के अलावा अन्य विपक्षी नेता भी सरकार पर भड़के:
कांग्रेस: राहुल गांधी ने पीएम मोदी को “कमजोर पीएम” कहा और पुराना ट्वीट शेयर किया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे “ट्रंप का जन्मदिन गिफ्ट” बताया, कहा कि विदेश नीति अब “राष्ट्रीय हितों की रक्षा” से “बेयर हग्स, खोखले नारे और कॉन्सर्ट्स” तक सिमट गई है।
पवन खेरा (कांग्रेस): “ट्रंप रोज भारत का अपमान करता है, लेकिन पीएम चुप हैं। 2017 में राहुल ने चेतावनी दी थी।”
इमरान मसूद (कांग्रेस): “विदेश नीति पूरी तरह फेल हो गई।”

