ईंधन गैस बुकिंग के आधार पर घर-घर सिलेंडर पहुंचाने की पूर्व व्यवस्था बहाल हो
गैस गोदाम पर वितरित हो रहे सिलेंडर पर होम डिलीवरी दाम वसूलना सरासर गलत
940 रुपए का गैस सिलेंडर काला बाजार में 1500 तक मिलने की चर्चा
रीवा । समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, मध्य प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ईमेल ज्ञापन भेजकर घरेलू ईधन गैस सिलेंडर जैसी आवश्यक आपूर्ति के दामों और बुकिंग समयावधि में वृध्दि और वज़न में 30% कटौती की बात को वापस लिए जाने के साथ मध्यप्रदेश के रीवा जिले की ईधन गैस वितरण व्यवस्था सही कर गैस सिलेंडर की घर-घर आपूर्ति कराने का आग्रह किया है।
श्री खरे ने कहा कि ईंधन गैस कंपनियों ने मध्य पूर्व एशिया युद्ध की शुरुआत से ही 14.2 किलोग्राम वाले ईंधन गैस सिलेंडर के दामों में 60 रुपए की वृद्धि कर आम आदमी की अत्यंत महत्वपूर्ण जरूरत पर अनावश्यक बोझ लाद दिया है। इसके अलावा ईंधन गैस सिलेंडर बुकिंग की समयावधि भी 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई। ग्रामीण क्षेत्र में इसे 45 दिन कर दिया गया । इधर पता चला कि सिलेंडर में दी जा रही ईधन गैस के वजन को 14.2 किलो से घटाकर मात्र 10 किलो किया जा रहा है। खाना पकाने के गैस सिलेंडर की बुकिंग समयावधि में वृध्दि और फिर उसमें भरे जाने वाली गैस के वजन में लगभग 30% की कटौती सरासर ग़लत है। उन्होंने कहा कि खाना पकाने वाली गैस की आपूर्ति में किसी तरह की कटौती भोजन के अधिकार को छीऩना है।
श्री खरे ने कहा कि मध्य प्रदेश के संभागीय मुख्यालय रीवा शहर की ईंधन गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी बुरी तरह प्रभावित नजर आ रही है। आईएफ संबंध में मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ईमेल ज्ञापन भेजकर ध्यान आकर्षित कराया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि घरेलू गैस सिलेंडर के लिए होम डिलीवरी की जगह उपभोक्ताओं को गोदाम जाकर लंबी कतार में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। लेकिन कोई गारंटी नहीं कि बुकिंग के पश्चात लंबी लाइन में खड़ा होने पर भी आपको भरा सिलेंडर मिल जाए। बहुत से लोगों के खाली हाथ लौटने की शिकायतें भी है। लाइन में यदि टोकन सिस्टम होता तो भीड़ भी छटती और अतिरिक्त लोगों का समय बर्बाद नहीं होता। यह बात व्यवस्था पर सवालिया निशान है। बुकिंग क्रमांक के अनुसार लोगों के घरों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति क्यों नहीं की जा रही है। इस दौरान गैस के दामों में भी ₹60 की वृद्धि कर दी गई । वैसे भी गैस सिलेंडर लेने के लिए आने जाने का खर्च भी बढ़ गया। भरा गैस सिलेंडर मिलने में कितना समय लग जाए इसकी भी कोई सीमा नहीं है। परंपरागत ईंधन साधनों की जगह बड़े पैमाने पर ईधन की विदेशी निर्भरता से आत्म निर्भर भारत के दावे खोखले नज़र आ रहे है। उम्र के अंतिम पड़ाव में वरिष्ठ नागरिक इस हालत में नहीं कि वे सिलेंडर लेकर लंबी लाइन का सामना कर सकें। ज्ञापन में इस बात पर ध्यान आकर्षित कराया गया कि लम्बी लाइन में लगने पर जिन लोगों को सिलेंडर मिला है,उनसे होम डिलीवरी का शुल्क भी वसूला जा रहा है। ईंधन गैस का संकट इस कदर है कि खाना पकाने के लिए लोग सिलेंडर की अधिक से अधिक कीमत भी चुकाने के लिए मजबूर हैं।
ईमेल ज्ञापन में इस बात का भी जिक्र किया गया कि भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता जी ने एक अपील में कहा है कि घबराएं नहीं अफवाहों से बचें, घर पर ही मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर। लेकिन अभी तक की जमीनी हकीकत कुछ और है। पेट्रोलियम मंत्रालय के द्वारा देश के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद होने का दावा करने के बाद भी अराजक हालात निर्मित होना व्यवस्था पर सवाल है। ऐसी स्थिति में सिलेंडरों की कालाबाजारी होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। श्री खरे ने कहा की शहरी क्षेत्रों में पक्के घर होने की वजह से लकड़ी, बुरादा और कोयला से खाना पकाना मुश्किल है। किरायेदारों के लिए तो और भी मुश्किल है। उन्हें तो मकान मालिक के द्वारा धुएं के नाम पर घर खाली करने के लिए भी कहा जा सकता है। बिजली से खाना पकाना खतरे से खाली नहीं है। बिजली का बिल भी काफी आएगा। सरकार के ईंधन गैस के पर्याप्त भंडारण के दावे के बावजूद आखिरकार लोगों के घरों तक गैस सिलेंडर क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे मौके पर एलपीजी की जगह पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने की बात उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठाना जैसा होगा। मौजूदा समय में खाली सिलेंडर को भरवाना जन समस्या का समाधान है, ना कि पीएनजी कनेक्शन का लाभ गिनाना। खाना पकाने के ईंधन को लेकर लोगों की चिंताएं और आक्रोश स्वाभाविक हैं। लोगों के सुबह से लंबी लाइन में खड़ा होने के बाद भी जरूरतमंदों को समय पर सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो पाना बहुत चिंताजनक और आपत्तिजनक बात है। ज्ञापन में मांग की गई कि सिलेंडर में ईंधन गैस के वजन में कटौती, दामों में वृद्धि और बुकिंग अवधि में वृध्दि को तत्काल प्रभाव से वापस लेते हुए वितरण समस्या का अविलम्ब निराकरण करने के निर्देश दिए जाएं और रीवा मध्यप्रदेश में पहले की तरह ईंधन गैस सिलेंडर का घर-घर वितरण किया जाए। श्री खरे ने कहा है कि 940 रुपए का गैस सिलेंडर 1500 रुपए तक कालाबाजार में मिलने की खबर है। गैस सिलेंडर नहीं मिल पाने से परेशान लोग ऐसा करने को मजबूर नज़र आ रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि महंगाई बढ़ जाती है तो क्या खाना खाना बंद कर देते हैं लोग ? सरकार को इस पर प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए।

