AI Matchmaking: एआई अब सिर्फ कोडिंग, रिसर्च और ऑटोमेशन के काम ही नहीं आ रहा है। इसकी मदद से लोगों के दिल भी मिल रहे हैं। जापान में तो सरकार ने बकायदा एआई डेटिंग ऐप भी लॉन्च की हुई है, जहां लोग आकर मिल रहे हैं और कई लोग अब तक शादी भी कर चुके हैं. करीब 2 साल पहले लॉन्च हुई इस ऐप पर मिले 265 कपल्स ने शादी कर ली है, जबकि 700 से ज्यादा कपल्स सीरियसल रिलेशनशिप में है।
कैसे हुई ऐप की शुरुआत?
दिलों को मिला रहा एआई, यहां सरकारी ऐप से डेटिंग कर रहे लोग
जापान सरकार ने सितंबर, 2024 में Tokyo Enmusubi नाम से एक एआई पावर्ड मैचमेकिंग ऐप लॉन्च की थी. इसका एकमात्र उद्देश्य जापान की गिरती जन्मदर को रोकना था. दरअसल, एक सर्वे किया गया था, जिसमें पता चला कि शादी करने की इच्छा रखने वाले करीब 70 प्रतिशत लोग डेटिंग ही नहीं कर रहे हैं. इसे देखते हुए सरकार ने इस ऐप की शुरुआत की. डेटिंग को सेफ और सिक्योर बनाने के लिए इस पर कुछ पाबंदियां भी लगाई गईं. जैसे इस ऐप पर कोई भी अपनी मर्जी से अकाउंट नहीं बना सकता है. सबसे पहले लोगों को यह साबित करना होगा कि वो कानूनी तौर पर सिंगल है और इसके बाद उन्हें एक ऑनलाइन इंटरव्यू भी पास करना होता है. इसके बाद उन्हें ऐप पर रजिस्टर किया जाता है. इस ऐप पर रजिस्टर होने के लिए 36,000 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन इनमें से करीब 16,000 को ही रजिस्टर किया गया है.
ऐप से हुआ यह फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऐप के जरिए 760 कपल्स सीरियस रिलेशनशिप में आ चुके हैं, जबकि 265 ने शादी कर ली है. एक यूजर ने बताया कि उसने अपने 40वें जन्मदिन से पहले इस ऐप पर रजिस्टर किया था. अगस्त में उन्होंने एक व्यक्ति से डेटिंग शुरू की, सितंबर तक आते-आते उनका रिश्ता गंभीर हो गया और उन्होंने दिसंबर में शादी के लिए हां कर दी। एक और यूजर ने बताया कि ऐप में मिलने वाला कंपेटिबिलिटी स्कोरिंग का फीचर काफी काम आ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर आप किसी से मिलने को लेकर स्योर नहीं हैं तो कंपेटिबिलिटी रेटिंग आपके काम आ सकती है. यह आपको लोगों से मिलने के लिए प्रेरित करती है।
क्यों शुरू की गई यह ऐप?
जापान में पिछले 10 वर्षों से जन्मदर लगातार घट रही है और इसने सरकार की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. पिछले साल जापान में केवल 6.71 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो पिछले 125 सालों में सबसे कम है। यहां प्रजनन दर 1.14 पर पहुंच गई है। यहां जन्म की तुलना में मौतों की संख्या दोगुनी से अधिक है. इस बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए सरकार चाह रही है कि लोग ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करें. इसी वजह से आमतौर पर प्राइवेट कंपनियों की तरफ से ऑपरेट होने वाली डेटिंग सर्विस में सरकार खुद को शामिल कर रही है।
दिलों को कैसे मिलाती है एआई?
एआई डेटिंग ऐप्स की बात करें तो इनमें मैचमेकिंग एल्गोरिदम होते हैं. ये यूजर्स की पसंद, इंट्रेस्ट और बिहैवियर का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं। फिर इसे एआई और डीप लर्निंग जैसी टेक्नीक के जरिए प्रोसेस किया जाता है. इससे पैटर्न निकलकर सामने आता है. फिर जब किसी दूसरे यूजर में ऐसा पैटर्न देखा जाता है तो एआई की मदद से इन्हें एक-दूसरे को सजेस्ट किया जाता है. पिछले कुछ समय से ऐसी ऐप्स का ट्रेंड बढ़ा है।

