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भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सशक्त धुरी थीं अहिल्याबाई होलकर : लक्ष्मण प्रसाद आचार्य

लक्ष्मीबाई महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय ने आधारभूत संरचना और शैक्षणिक विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए नवनिर्मित ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर बहुउद्देशीय सभागार’ का भव्य उद्घाटन किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. लता शर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में निर्मित यह आधुनिक सभागार शैक्षणिक विमर्श, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा प्रमुख संस्थागत आयोजनों के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगा।

 

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आये असम के माननीय राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी ने कहा कि पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सशक्त धुरी थीं। उनका जीवन सुशासन, न्याय, सेवा, महिला नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नैतिक सशक्तीकरण और राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला है। महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से ज्ञान के साथ चरित्र, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रबोध विकसित करने का आह्वान किया।

 

उन्होंने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध लोक-संस्कृति, ग्रामीण परंपराओं और कृषि-जीवन से जुड़े गोरू बिहू के सांस्कृतिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत की प्रगतिशील भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से रानी लक्ष्मीबाई के साहस, नेतृत्व और दृढ़ संकल्प को अपने जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुनील कुमार मिश्रा के उद्घाटन वक्तव्य से हुआ। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभागार की स्थापना को महाविद्यालय की विकास-यात्रा का महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया। इसके पश्चात प्राचार्या प्रो. लता शर्मा ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने अहिल्याबाई होलकर के आदर्श शासन, न्यायप्रियता, जनकल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण और महिला नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नाम पर सभागार का नामकरण विद्यार्थियों को सेवा, साहस और उत्तरदायित्व के मूल्यों से निरंतर प्रेरित करेगा।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पूज्य विवेक मुनि महाराज ने अहिल्याबाई होलकर के जीवन और कार्यों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के सदुपयोग, अनुशासन, ज्ञानार्जन और कौशल-विकास के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उद्देश्यपूर्ण जीवन एवं सतत परिश्रम ही दीर्घकालीन सफलता और व्यक्तित्व के समग्र विकास का आधार हैं। प्रो. मिथुन कुमार ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने नवनिर्मित सभागार में वास्तविक जीवंतता का संचार किया है। उन्होंने इस महत्त्वपूर्ण परियोजना को सफलतापूर्वक पूर्ण कराने के लिए प्राचार्या प्रो. लता शर्मा के नेतृत्व एवं सतत प्रयासों की सराहना की और विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

समारोह में विद्यार्थियों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की थीम पर आधारित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।अंतरा शर्मा द्वारा प्रस्तुत मधुर असमिया गीत ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से भावविभोर किया।राज्यपाल ने विद्यार्थियों की उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए उनकी प्रतिभा, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का समापन संगीत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय मिश्रा एवं उनकी टीम के नेतृत्व में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. प्रेम प्रकाश मीणा, प्रो. सुनीता अरोड़ा, प्रो. प्रमिला, डॉ. स्वाति एस. मिश्रा, श्री पदम जैन, श्री विनय दास, प्रो. सीमा शर्मा कौशिक, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. रेखा और डॉ. मनराज गुर्जर सहित लगभग 300 शिक्षक, छात्राएँ एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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