हाल ही में नेपाल में युवाओं के नेतृत्व वाले बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को हिला दिया, जहां सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल हो गए। अब इसी तरह का बवाल फ्रांस में भड़क गया है। “ब्लॉक एवरीथिंग” (सब कुछ रोक दो) नामक आंदोलन के तहत सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जहां कई जगहों पर आगजनी, रोड ब्लॉकेज और पुलिस से झड़पें हो रही हैं। यह फ्रांस की राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक नीतियों के खिलाफ गुस्से का नतीजा है। आइए विस्तार से समझते हैं।
नेपाल में क्या हुआ?
नेपाल में 4 सितंबर को सरकार ने फेसबुक, ट्विटर (X), यूट्यूब, व्हाट्सएप समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया, जिसे रेगुलेटरी नियमों का हवाला देकर लागू किया गया। लेकिन युवाओं (मुख्य रूप से जेन Z) ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। प्रदर्शन भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता और “नेपो किड्स” (राजनेताओं के बच्चों की लग्जरी लाइफ) के खिलाफ फैल गए।
मुख्य घटनाएं:
8 सितंबर: काठमांडू में संसद पर हमला, पुलिस ने रबर बुलेट्स और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कम से कम 19 लोग मारे गए, 400 से ज्यादा घायल।
9 सितंबर: प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और मंत्रियों के घरों में आग लगा दी। दो जेलों से 900 कैदी फरार।
10 सितंबर तक: मौतों की संख्या 22 हो गई। सेना ने कर्फ्यू लगाया, लेकिन हिंसा जारी। एयरपोर्ट बंद, भारत-नेपाल बॉर्डर पर सतर्कता बढ़ी।
यह आंदोलन नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता (2008 से 12 से ज्यादा सरकारें बदलीं) और युवा बेरोजगारी (20% से ऊपर) का परिणाम है। संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा की निंदा की और जांच की मांग की।
फ्रांस में बवाल: “ब्लॉक एवरीथिंग” आंदोलन
फ्रांस में 10 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नया प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू नियुक्त किया, लेकिन इससे पहले ही सरकार गिर चुकी थी। बजट कटौती, पेंशन सुधार और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ यूनियनों और नागरिकों ने “ब्लॉक एवरीथिंग” कैंपेन शुरू किया। यह गिले वेस्ट (पीली जैकेट) आंदोलन की याद दिलाता है, जहां सड़कें ब्लॉक करना मुख्य हथियार है।
मुख्य घटनाएं:
प्रदर्शनकारियों ने पेरिस, बोर्डो, मार्सिले और टूलूज में सड़कें, ट्राम लाइनें और रेलवे ट्रैक ब्लॉक कर दिए। बोर्डो में 50 प्रदर्शनकारियों ने ट्राम रोकी, टूलूज-ऑच रेल लाइन पर केबल आगजनी से ट्रेनें रुक गईं।
आगजनी और तोड़फोड़: कचरा डिब्बे जलाए गए, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान। पेरिस में आंतरिक मंत्रालय पर हमला, 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां।
पुलिस कार्रवाई: 80,000 पुलिसकर्मी तैनात, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल। इंटीरियर मिनिस्टर ब्रूनो रिटेलो ने “शून्य सहनशीलता” की बात कही।
प्रभाव: ट्रेनें रुकीं, बाजार प्रभावित। प्रदर्शन पूरे देश में फैले, जहां 10,000 से ज्यादा लोग सड़कों पर हैं।
यह आंदोलन 2026 बजट के खिलाफ है, जिसमें कटौती और ऑस्टरिटी मेजर हैं। मैक्रों सरकार की अस्थिरता (एक साल में चौथा पीएम) ने गुस्सा भड़काया।

