नई दिल्ली में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी (जिन्हें तालिबान शासन के तहत विदेश मंत्री माना जाता है) के भारत दौरे (9-16 अक्टूबर 2025) के दौरान 11 अक्टूबर को अफगान दूतावास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। इस कॉन्फ्रेंस में केवल चुनिंदा पुरुष पत्रकारों को ही प्रवेश दिया गया, जबकि कई प्रमुख महिला पत्रकारों को रोका गया। यह घटना अफगानिस्तान में तालिबान के महिलाओं पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों (जैसे शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक भागीदारी पर रोक) के संदर्भ में और संवेदनशील हो गई।
मुत्तकी और तालिबान का पक्ष
मुत्तकी ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि “हमने नहीं किया था मना” – यानी यह जानबूझकर नहीं किया गया। तालिबान के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता ने इसे “तकनीकी मसला” बताया, न कि कोई नीतिगत फैसला। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉन्फ्रेंस के लिए सीमित पास उपलब्ध थे, जिसके कारण कुछ पुरुष पत्रकारों को भी प्रवेश नहीं मिला। प्रवक्ता ने जोर दिया कि मुत्तकी काबुल में नियमित रूप से महिला पत्रकारों से मिलते हैं और उन्होंने खुद 100 से अधिक इंटरव्यू दिए हैं। उन्होंने भविष्य में महिला पत्रकारों को आमंत्रित करने का वादा भी किया।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं
इस घटना पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना ससाना शुरू कर दिया, इसे महिलाओं के अपमान और सरकार की ‘नारी शक्ति’ नारों की खोखलापन का प्रतीक बताया:
प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस): उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया, “भारत में हमारे ही देश की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया, जबकि महिलाएं ही देश की रीढ़ और गौरव हैं।”
राहुल गांधी (कांग्रेस): “जब आप महिला पत्रकारों को सार्वजनिक मंचों से बाहर रखने की इजाजत देते हैं, तो आप भारत की हर महिला को यह बता रहे होते हैं कि आप बहुत कमजोर हैं। इस तरह के भेदभाव पर आपकी चुप्पी नारी शक्ति पर आपके नारों की खोखलीपन को उजागर करती है।”
पी चिदंबरम (कांग्रेस): उन्होंने पुरुष पत्रकारों को सलाह दी कि उन्हें कॉन्फ्रेंस से बाहर चले जाना चाहिए था।
महुआ मोइत्रा (तृणमूल कांग्रेस): “एक विदेशी मुस्लिम कट्टरपंथी अपनी ‘आस्था’ के नाम पर हमारी जमीन पर हमारी औरतों के साथ हमारे कानूनों और मूल्यों का उल्लंघन कर सकता है। हिम्मत कैसे हुई?”
भारत सरकार का स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह अफगान दूतावास द्वारा आयोजित थी, जिसमें उनका कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी। आमंत्रण 10 अक्टूबर को मुंबई के अफगान कांसुलेट जनरल ने भेजे थे, और दूतावास भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। मुत्तकी ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की, लेकिन कोई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई। यह विवाद भारत-अफगानिस्तान संबंधों के बीच आया, जहां भारत ने हाल ही में काबुल में अपने तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास का दर्जा दिया है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां कई यूजर्स ने इसे तालिबानी फरमान का विस्तार बताया।