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एससी एसटी के दुरुपयोग के चलते चित्रकूट में एक युवक ने दे दी अपनी जान!

एससी एसटी एक्ट लगने से अवसाद में था देवा द्विवेदी

यह एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग ही है कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट फर्जी एससी एसटी एक्ट लगने से एक युवक ने आत्महत्या कर ली है। दरअसल उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मानिकपुर थाना क्षेत्र स्थित गढ़चपा गांव (पतेरिया मजरा) में देवा द्विवेदी नाम के एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार, देवा द्विवेदी पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में था। परिवार का आरोप है कि उसके खिलाफ दो महीने पहले मानिकपुर थाने में एक मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में SC/ST Act की धाराएं भी शामिल थीं। इसी मुकदमे के तनाव के कारण उसने आत्महत्या कर ली। दरअसल मौजूदा दौर में एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। गांव देहात में फर्जी एससी एसटी एक्ट के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। यही वजह है कि यूजीसी एक्ट का जमकर विरोध हो रहा है। सवर्ण छात्रों रहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भी उन पर एससी एसटी एक्ट के मामले दर्ज हो सकते हैं।
दरअसल एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) के दुरुपयोग के मामले मुख्य रूप से व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने, जमीन-विवाद या सरकारी मुआवजे हासिल करने के लिए दर्ज हुए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष कर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में अदालतों और पुलिस जांच में यह सामने आया है। अदालतों, मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस आंकड़ों के अनुसार इसके मुख्य उदाहरण निम्नलिखित जगहों पर देखे गए हैं।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एससी-एसटी एक्ट के तहत कई मामले फर्जी पाए गए हैं, जिसके बाद प्रशासन द्वारा दी गई सहायता राशि की रिकवरी के आदेश दिए गए और कार्रवाई की गई।
ललितपुर (उत्तर प्रदेश): यहाँ वर्ष 2000 में एक फर्जी मामला दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति को 20 साल तक जेल में रहना पड़ा और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें बेगुनाह करार दिया।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): यहाँ की एक अदालत ने निजी दुश्मनी के चलते निर्दोष लोगों पर करीब 20 फर्जी एससी-एसटी केस दर्ज करवाने वाले एक वकील को सजा और जुर्माना लगाया तथा इसे “झूठे मामलों की फैक्ट्री” करार दिया।
झांसी में एक ही परिवार द्वारा अलग-अलग मामलों में मुआवजा लेने का मामला सामने आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में इस तरह के मामलों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
हाथरस में एससी-एसटी एक्ट का एक मामला अदालत में फर्जी साबित हुआ, जिसके बाद झूठा आरोप लगाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
दुरुपयोग के प्रमुख कारण और क्षेत्र:
अदालतों और रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जगहों पर वकीलों और बिचौलियों के गिरोह झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर सरकार से मिलने वाले अत्याचार निवारण मुआवजे की रकम हड़पने की कोशिश करते हैं।
निजी रंजिश: दफ्तरों, परिसरों, गांवों या शिक्षण संस्थानों में आपसी विवाद, ज़मीन के झगड़े या व्यक्तिगत खुन्नस निकालने के लिए इस कानून के प्रावधानों के इस्तेमाल की शिकायतें समय-समय पर विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आई हैं।
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