दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सरकारी अस्पतालों के कामकाज के तौर तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान के कोटा की रहने वाली 16 साल की तन्वी ने मंगलवार साल तक सर्जरी के इंतजार के बाद दम तोड़ दिया। इस घटना से परिवार सदमे में है और न्याय की मांग कर रहा है।
मामले को बढ़ता देख AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है जो तन्वी की मौत की जांच करेगी. तन्वी को जन्म से ही वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) था। वो इसकी सर्जरी के लिए 13 सालों से एम्स के चक्कर काट रही थी, लेकिन हर बार उसकी सर्जरी टाल दी गई. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर 2013 से 2026 तक के समय में ऐसा क्या हुआ जो तन्वी की सर्जरी नहीं हो सकी?
पिता ने की न्याय की गुहार
कोटा की रहने वाली तन्वी की मंगलवार सुबह मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वो AIIMS दिल्ली में हार्ट सर्जरी के लिए 13 साल से इंतजार कर रही थी। उसे 2012 से दिल की जन्मजात बीमारी थी। उसके माता-पिता AIIMS के बार-बार चक्कर लगाते और हर बार किसी न किसी कारण से उसकी सर्जरी की तारीख टाल दी जाती।
परिजनों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से भी गुहार लगाई, लेकिन बावजूद सर्जरी नहीं हो पाई. तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने कहा, “मैं पिछले 14 साल से दिल्ली में भाग-दौड़ कर रहा हूं. मुझे न्याय चाहिए और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे सिर्फ़ बहाने या औपचारिकताएं नहीं चाहिए। मैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास गुजारिश करता हूं कि तीन बार शिकायत करने के बावजूद मेरी बेटी को बचाया नहीं जा सका।
AIIMS ने किया उच्चस्तरीय कमेटी का गठन
वहीं, मामले के बढ़ने पर AIIMS ने उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। AIIMS द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2012 को AIIMS के कार्डियोलॉजी OPD में तन्वी की सबसे पहले जांच हुई थी. इस जांच में तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया होने का पता चला। ये बीमारी जन्मजात होती है, जिसमें दिल से फेफड़ों तक खून के बहाव के रास्ते में परेशानी आती है।
साल 2013 में सर्जरी के लिए दिल का मूल्यांकन किया गया. इसके लिए CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशन एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी आधुनिक जांच तकनीकों का इस्तेमाल कर तन्वी के दिल की बनावट और सर्जरी की संभावनाओं पर काम हुआ।
2017 में सर्जरी से मना क्यों?
जांच पूरी होने के बाद साल 2017 में दिल की बनावट और बीमारी की जटिलता को देखते ये तय हुआ कि तन्वी की सर्जरी संभव नहीं है। परिजनों को सलाह दी गई कि वो तन्वी को नियमित जांच कराने और दवा से इलाज कराएं. तन्वी इसके बाद नियमित चेकअप के लिए AIIMS के संपर्क में रही. इसके बाद इसी साल 24 अगस्त को तन्वी को हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना की जांच के लिए भर्ती किया गया था।
तन्वी के परिवार ने सर्जरी की संभावना को लेकर अन्य राय भी ली. पिछले साल परिवार ने कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के प्रमुख से राय ली थी। CTVS ने भी दवा से इलाज की सलाह दी थी। इसके बाद परिवार ने एक और सीनियर कार्डियोथोरेसिक सर्जन से राय ली थी तब उन्होंने भी दवा से इलाज जारी रखने की सलाह दी थी।
AIIMS उठाएगा आवश्यक कदम
तन्वी की हालत बिगड़ने पर उसे अगस्त 2026 को AIIMS लाया गया। 24 अगस्त 2026 को भर्ती कर उसकी पूरी जांच की गई. इस जांच में उसकी बीमारी की गंभीर स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन की संभावना कितनी है इसकी भी जांच की गई। इसके बाद 1 सितंबर को तन्वी की मौत हो गई। AIIMS ने अपने पोस्ट में मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता, सबूतों पर आधारित क्लिनिकल फैसले लेने और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा है कि पोस्टमार्टम के बाद जो भी जांच सामने आयेगी उस अनुसार कदम उठाया जाएगा।

