समाजवादी विचारधारा के एक और सच्चे सिपाही हमें छोड़कर चले गए। वरिष्ठ समाजवादी साथी श्याम गंभीर जी हमारे बीच नहीं रहे। नाम से तो मैं उन्हें काफी समय से जानता था पर उनसे मेरी मुलाक़ात 2017 में दिल्ली जंतर मंतर पर उस समय हुई जब सोशलिस्ट पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह मॉब लिंचिंग के खिलाफ आमरण अनशन पर थे। बाद में मैं भी पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने लगा और उनसे लगातार मुलाक़ात होती रही। इस बीच श्याम गंभीर जी से काफी कुछ सीखने को मिला। श्याम गंभीर जी देश के एक वरिष्ठ समाजवादी नेता, विचारक और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता थे। वे लंबे समय से सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) से जुड़े रहे और पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे।
श्याम गंभीर का संबंध लोहियावादी और समाजवादी विचारधारा से रहा है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के पूर्व प्रोफेसर और एक मजबूत समाजवादी हस्ती के रूप में जाने जाते रहे है। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के विभिन्न आंदोलनों, सम्मेलनों और वैचारिक बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। उन्होंने देश में समतामूलक समाज के निर्माण और गैर-बराबरी को समाप्त करने की राजनीति का समर्थन किया है। श्याम गंभीर तिब्बत की स्वतंत्रता और तिब्बती समुदाय के अधिकारों के एक वयोवृद्ध व मुखर समर्थक भी रहे हैं, जो दिल्ली (मजनू का टीला आदि) में तिब्बत से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होते रहे हैं। श्याम गंभीर विभिन्न नागरिक मंचों, शांति यात्राओं और जन-संवाद कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं तथा रेलवे के निजीकरण जैसे मुद्दों के खिलाफ धरने-प्रदर्शनों में भी अग्रणी रहे हैं।
– चरण सिंह








