बिजनौर के बाद अब मुरादाबाद में लगीं वर्चस्व कायम करने में
बिजनौर से विधायक के साथ ही रही हैं जिला पंचायत अध्यक्ष
एसटी हसन का टिकट कटवा कर बनीं मुरादाबाद से सांसद
अब कमाल अख्तर को कर दिया मुख्य सचेतक से इस्तीफा देने को मजबूर
चरण सिंह
शर्मीली स्वभाव की रुचि वीरा ने जब राजनीति में कदम रखा तो न केवल अपने ससुराल के क्षेत्र बिजनौर में विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष बनकर अपना रुतबा कायम किया बल्कि पड़ौसी जिले मुरादाबाद में भी अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम कर लिया। मुस्लिम बहुल जिले में वैश्य समाज की बहू ने ऐसे झंडे गाड़े कि न केवल 2024 के लोकसभा चुनाव सिटिंग एमपी का एसटी हसन का टिकट कटवाकर मुरादाबाद से सांसद बनीं बल्कि कांठ से विधायक विधानसभा में मुख्य सचेतक से इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर कमाल अख्तर को भी अपनी ताकत का अहसास करा दिया। अब अपनी बेटी स्वाति वीरा को मुरादाबाद शहर से विधायक बनाने में लग गई हैं।
दरअसल 2024 के लोकसभा चुनाव में जब सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आजम खां की परंपरागत सीट रामपुर से एमपी का टिकट दिल्ली के मौलाना माहिबुल्लाह नदवी को टिकट दे दिया तो आजम खां भड़क गए उन्होंने रामपुर से अपना प्रत्याशी उतारने चेतावनी दे दी। तब आजम खां के दबाव में अखिलेश यादव ने तत्कालीन सांसद एसटी हसन का पर्चा वापस कराकर रुचि वीरा को टिकट दे दिया।
रुचि वीरा दमदार चुनाव लड़ा और मुरादाबाद से सांसद बन गईं। अब जब अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं तो सपा में पीडीए चौपाल का दौर चल रहा है। कांठ से विधायक कमाल अख्तर ने जब पीडीए की चौपाल कराई तो न तो रुचि वीरा के फोटो पोस्टरों में लगवाए और न ही उन्हें चौपाल में बुलाया। रुचि वीरा ने मामले में नाराजगी दिखाते हुए इसकी शिकायत अखिलेश यादव से की। वर्चस्व की इस लड़ाई में कमाल अख्तर को विधानसभा में मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देना पड़ा।
रुचि वीरा मुरादाबाद में अपने पैर जमाना चाहती हैं। मुरादाबाद शहर से अपनी बेटी स्वाति वीरा को विधायक का चुनाव लड़ाना चाहती हैं। मुस्लिम बहुल जिले में एसटी हसन और कमाल अख्तर समेत दूसरे मुस्लिम नेताओं को रुचि वीरा के बढ़ते वर्चस्व से दिक़्क़त होने लगी है।
आज की तारीख में भले ही रुचि वीरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति छाई हुई हों पर वीरा परिवार रुचि वीरा नहीं बल्कि उनके पति उदयन वीरा को राजनीति में स्थापित करना चाहता था। राजतंत्र में बनियो की रियासत रही धर्मनगरी के कुंवर उदयन वीरा तो दिल्ली में ठेकेदारी कर रहे थे। रुचि वीरा भी उनके साथ दिल्ली में ही रहती थीं। उदयन वीरा के पिता पूर्व मंत्री कुंवर सत्यवीर उन्हें सपा से टिकट दिलाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राम शरण दास का एक कार्यक्रम उन्होंने आदर्श विद्या निकेतन इंटर कॉलेज केलवाला में भी कराया था। प्रख्यात समाजवादी पर स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर हर गुलाल सिंह प्रतिमा का भी उन्होंने अनावरण किया था। 2002 के बिजनौर विधानसभा से उदयन वीरा का टिकट हो भी गया था पर तस्लीम अहमद ने उनका टिकट कटवा कर अपना टिकट करा लिया था। उदयन वीरा निर्दलीय चुनाव लड़े और अपनी जमानत भी न बचा सके। हालांकि वह जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे पर कोई खास पहचान न बना सके। आज की तारीख में उनका स्वाथ्य काफी ख़राब रहता है।
रुचि वीरा न राजनीति में कदम रखते ही अपने को साबित करना शुरू किया। बोल्ड निर्णय लेने वाली रुचि वीरा बिजनौर से न केवल विधायक बल्कि जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहीं। जिला-जेपी नगर के हसनपुर में जन्मीं रुचि वीरा ने महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वह वैश्य समुदाय से हैं। रुचि वीरा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सर्वेश सिंह को लगभग 1.5 लाख वोटों से हराया। उन्हें समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के करीबी माना जाता है।
रुचि वीरा 2005 से 2007 तक बिजनौर जिला पंचायत अध्यक्ष 2014-2017 में एक कार्यकाल के लिए बिजनौर सदर से विधायक रह चुकी हैं। वीरा को उप चुनाव में विधायक चुना गया था। जब मौजूदा विधायक कुंवर भारतेंद्र सिंह 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्होंने 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सूची चौधरी से अपनी सीट खो दी।






