हरियाणा के सोनीपत (Sonipat) जिले के इब्राहिमपुर कुराड़ गांव के 30 वर्षीय युवक अंकित (Ankit Jangra या Ankit) की कहानी लगती है। क्या हुआ था? अंकित मार्च 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। परिवार ने पढ़ाई और बेहतर नौकरी के लिए पैसे जुटाए (कुछ रिपोर्ट्स में जमीन बेचने की भी बात है)। वहां एक ट्रैवल एजेंट ने उसे धोखा दिया। शुरू में होटल या अन्य काम का लालच दिया, लेकिन बाद में रूसी आर्मी में जबरन भर्ती कर लिया।
सिर्फ 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद उसे यूक्रेन फ्रंटलाइन पर भेज दिया गया। अगस्त 2025 में युद्ध में उसकी मौत हो गई (यूक्रेनी ड्रोन अटैक या स्ट्राइक में)। शव 6-7 महीने बाद (अप्रैल 2026 में) घर पहुंचा। परिवार ने शव को दिल्ली एयरपोर्ट से रिसीव किया और गांव में अंतिम संस्कार किया। पूरा गांव मातम में डूबा हुआ है। “पापा, हम फंस चुके हैं” वाली वॉइस/वीडियो कई ऐसे भारतीय युवकों की है जो रूस में फंसे थे। उन्होंने परिवार को मैसेज भेजे थे कि उन्हें धोखे से आर्मी में भर्ती कर लिया गया है, खाना नहीं मिल रहा, और जबरन लड़ाई लड़ाई जा रही है। अंकित या उसके जैसे कई युवकों ने ऐसी अपील की थी।
व्यापक संदर्भ
रूस-यूक्रेन युद्ध में कई भारतीय युवक (खासकर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, UP आदि से) इसी तरह फंस चुके हैं। एजेंट्स उन्हें अच्छी सैलरी (कुछ लाख रुपये महीना) का लालच देकर रूस ले जाते हैं, लेकिन स्टडी/टूरिस्ट वीजा पर जाकर आर्मी में धकेल देते हैं। भारतीय सरकार (MEA) के अनुसार अब तक 26+ भारतीय इस युद्ध में मारे जा चुके हैं, कई शव वापस आए, 50+ अभी भी फंसे हैं, और सैकड़ों को वापस लाया गया है। परिवार अक्सर एजेंट्स के खिलाफ शिकायत करते हैं, लेकिन कई बार युवक आर्थिक मजबूरी में जाते हैं। यह घटनाएं युवाओं को विदेश जाने से पहले सतर्क रहने की याद दिलाती हैं — एजेंट्स के झांसे में न आएं, MEA की सलाह लें। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है। शांति की कामना।







