किसान सभा ने प्राधिकरण के मुआवजा वृद्धि व विकसित भूमि प्रस्ताव को बताया नाकाफी

गौतम बुद्ध नगर। किसान सभा ने प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित मुआवजा वृद्धि एवं विकसित भूमि के प्रस्ताव को पूरी तरह से अपर्याप्त बताते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय करार दिया है। किसान सभा के नेतृत्व में वर्ष 2023 में किसानों द्वारा 124 दिनों तक ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन किया गया था। इस आंदोलन के दौरान दिनांक 19 सितंबर 2023 को प्राधिकरण के साथ 23 सूत्रीय समझौता हुआ था, जिसमें नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था।

यह उल्लेखनीय है कि आंदोलन के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष वर्मा द्वारा मुआवजा वृद्धि के संबंध में एक समिति का गठन किया गया था, लेकिन उक्त समिति आज तक कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सकी। किसान सभा ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया है और लगातार नए कानून के अनुसार सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा एवं 20% विकसित भूमि देने की मांग करती रही है।

किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान सभा नए कानून को लागू कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। प्राधिकरण ने बार-बार आश्वासन दिया कि मुआवजा बढ़ाया जाएगा और विकसित भूमि का हिस्सा बढ़ाया जाएगा, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान में जो प्रस्ताव लाया जा रहा है, वह किसानों के साथ न्याय करने में पूरी तरह विफल है।

किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी द्वारा प्राधिकरण हेतु भूमि क्रय में 6% प्लॉट के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया था। किसान सभा लगातार इस प्रावधान को पुनः लागू करने तथा इसे बढ़ाकर 20% करने की मांग करती रही है। इस विषय पर प्राधिकरण और किसान सभा के बीच कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।

किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि प्राधिकरण वर्षों से जेवर एयरपोर्ट का हवाला देकर मुआवजा वृद्धि को टालता रहा है। वर्तमान प्रस्ताव भी अत्यंत कम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सुनपुरा जैसे गांवों में निजी कॉलोनियों में भूमि 15,000 से 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक खरीदी जा रही है, जबकि प्राधिकरण मात्र 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर का प्रस्ताव दे रहा है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि वर्तमान मुआवजा दर लगभग 4,125 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जो बेहद कम है। इसके चलते अनियोजित कॉलोनियां विकसित हो रही हैं और प्राधिकरण का नियोजित विकास का उद्देश्य समाप्त होता जा रहा है। यही कारण है कि प्राधिकरण नए विकास कार्यों को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। किसान सभा ने स्पष्ट किया है कि जब तक भूमि का मूल्य बाजार दर एवं नए कानून के अनुसार निर्धारित नहीं किया जाएगा तथा 20% विकसित भूमि का प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा, तब तक किसान अपनी भूमि देने के लिए तैयार नहीं होंगे।

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