सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) झारखंड में पेसा कानून (अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम) के लागू किए जाने का स्वागत करती है। यह कदम आदिवासी समाज के जल–जंगल–ज़मीन पर पारंपरिक अधिकारों की संवैधानिक मान्यता और ग्रामसभा की सर्वोच्चता को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
हालाँकि पार्टी यह भी रेखांकित करती है कि राज्य गठन के बाद पेसा कानून को लागू करने में पूरे 25 वर्ष लग जाना, शासन–प्रशासन की गंभीर उदासीनता और आदिवासी अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैये को उजागर करता है। यह देरी स्वयं में एक बड़ा अन्याय रही है, जिसकी कीमत आदिवासी समुदायों ने विस्थापन, शोषण और संसाधनों की लूट के रूप में चुकाई है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि पेसा के प्रभावी क्रियान्वयन से स्थानीय स्वशासन, लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया और सांस्कृतिक स्वायत्तता को मजबूती मिलेगी। खनन, भूमि अधिग्रहण और तथाकथित विकास परियोजनाओं में ग्रामसभा की पूर्व, स्वतंत्र और सूचित सहमति सुनिश्चित होना अनिवार्य होगा।
पार्टी राज्य सरकार से मांग करती है कि पेसा का क्रियान्वयन काग़ज़ी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि इसके लिए ग्रामसभाओं को अधिकारों की पूरी जानकारी, प्रशासनिक प्रशिक्षण तथा कानून के उल्लंघन पर सख़्त जवाबदेही तय की जाए।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का आग्रह है कि पेसा की भावना के अनुरूप विकास जन–केंद्रित हो और आदिवासी समुदायों की भागीदारी, आजीविका तथा प्रकृति-संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। हमारी अपेक्षा है कि झारखंड में पेसा का सही और ईमानदार क्रियान्वयन पूरे देश के अनुसूचित क्षेत्रों के लिए एक मिसाल बने।








