मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे हैं सुशासन बाबू, टूट भी सकती है जदयू
संजय झा और ललन सिंह कर सकते हैं नीतीश के साथ खेल
चरण सिंह
बिहार में चुनावी प्रचार शबाब पर आ चुका है। महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव को सीएम पद का चेहरा बना दिया गया है। एनडीए नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ रहा है पर सीएम पद का चेहरा नहीं बनाया है। बाकायदा गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव परिणाम के बाद विधायकों के सीएम पद का निर्णय करने की बात कहकर जेडीयू खेमे में हलचल पैदा कर है।
दरअसल बिहार में चाहे आरजेडी और या फिर बीजेपी दोनों की मज़बूरी नीतीश कुमार बनते रहे हैं। इस बार स्थिति उलट है न तो बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने जा रही है और न आरजेडी। ऐसे में प्रश्न उठता है कि एनडीए की सरकार बनने पर यदि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री न बनाया गया तो वह क्या करेंगे ? क्या बीजेपी उन्हें राज्यपाल या उप राष्ट्रपति पद का लालच देगी ? उप राष्ट्रपति पद तो अब नीतीश कुमार के हाथ से निकल चुका है ऐसे में क्या नीतीश कुमार राज्यपाल पद पर मान जाएंगे ?
यदि नीतीश कुमार तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाते हैं तो फिर उन्हें वहां से क्या मिलेगा ? तो क्या नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत को राजनीति में ला सकते हैं ? एनडीए में भले ही निशांत को कोई मंत्री पद मिल जाए। हो सकता है कि डिप्टी सीएम भी बना दिया जाए पर महागठबंधन में कुछ नहीं मिलने वाला है। डिप्टी सीएम पद का उम्मीदवार मुकेश सहनी को बना दिया गया। एक और डिप्टी सीएम मुस्लिम हो सकता है। ऐसे में निशांत के लिए महागठबंधन में कुछ खास नहीं है।
उधर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पूरी तरह से गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सटे हुए हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद जदयू को तोड़ा भी जा सकता है। यदि जदयू टूटता है तो फिर नीतीश क्या करेंगे ? क्या बीजेपी, ललन सिंह और संजय झा को सबक सिखाने के लिए लिए बड़े भाई लालू प्रसाद से हाथ मिला सकते हैं।








