गलत का साथ और सही को दबाकर की जा रही लूट खसोट
मुट्ठी भर लोगों ने कब्जाई देश की संपत्ति, बेचारा बना घूम रहा है आम आदमी
चरण सिंह
आए दिन किसी ब्यूरोक्रेट्स, नेता और पूंजीपति के घर से अवैध कमाई से अर्जित किया गया अथाह धन बरामद हो रहा है। देश में कितने भी बड़े बड़े दावे किये जा रहे हों पर गैर बराबरी की खाई बढ़ी है। पंजाब के एक पुलिस अधिकारी के यहां से 7 करोड़ कैश, 2.5 KG गोल्ड, लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं। ऐसा भी नहीं है कि यह कोई पहला अधिकारी हो जिसके यहां से इतने स्तर पर अवैध कमाई का सामान मिला हो। मतलब इस अधिकारी ने जमकर जनता को लूटा है। मतलब रिश्वत लेकर गलत का साथ दिया है और सही का उत्पीड़न किया है। पर लोगों को इससे क्या मतलब ? उन्हें तो गुलामी की आदत पड़ी हुई है। कर्जा लेकर काम चल रहा है। पांच किलों राशन तो मिल ही जा रहा है। इनकी नजरों में देश और समाज जाए भाड़ में। देश को कोई कितना भी लुटाता रहे। इन्हें तो अपनी जाति देखनी है। धर्म देखना है। पार्टी देखना है। नेता देखना है। बच्चे तो कुछ नहीं करेंगे तो फिर कौन देगा रोजगार ?
यह लेख मैं इसलिए लिख रहा हूं कि ब्यूरोक्रेट्स, नेता, जज और पूंजीपतियों के यहां से लगातार अवैध कमाई से जमा किया धन बरामद हो रहा है। आम आदमी है कि वह हिन्दू और मुस्लिम में उलझा है। उसे तो लगता नहीं नहीं कि देश में भ्रष्टाचार है। मोदी जो बैठे हैं केंद्र में। पांच किलो राशन दे रहे हैं परिवार चलाने के लिए। देश में एक चर्चा और शुरू हो गई है कि देश दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इन बेचारों कौन समझाए कि सम्पत्ति और धन ब्यूरोक्रेट्स, नेता और पूंजीपति का बढ़ा है। आम आदमी तो बेचारा कम आय और खर्चा अधिक होने से दम तोड़ रहा है। यकीन नहीं आ रहा तो दिवाली पर खुदरा खरीदारी ही देख लीजिये। छोटे छोटे बाजारों की रौनक देख लीजिये।
यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि समाजवाद की लड़ाई कमजोर पड़ी है। लड़ाई इसलिए कमजोर पड़ी है क्योंकि जो समाजवाद का झंडा लिए घूम रहे हैं। उनमें से अधिकतर ऐसे हैं। जिन्होंने खुद अथाह सम्पत्ति अर्जित कर रखी है। यदि गैर बराबरी की लड़ाई लड़ी जाए तो सबसे पहले इन कथित समजवादियों का ही विरोध होगा। देश में समाजवाद की लड़ाई इसलिए ही तो लड़ी गई थी कि अमीर और गरीब के बीच की दूरी कम हो। गैर बराबरी की खाई कम हो। कौन करेगा विरोध ? देश की आधी संपत्ति मुश्किल से दो-तीन प्रतिशत लोगों के पास है।
दरअसल पंजाब के रोपड़ रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 16 अक्टूबर को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया है। दिलचप्स बात यह है कि भुल्लर पूर्व पंजाब DGP महल सिंह भुल्लर के बेटे हैं और उन्होंने फतेहगढ़ साहिब के एक स्क्रैप डीलर अकाश भट्टा से 8 लाख रुपये का रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। तो क्या इनके पिताजी इन्हें यही संस्कार दिए थे। क्या वह भी रिश्वतखोर अधिकारी थे ? समझा जा सकता है कि पुलिस जनता के लिए कितना काम करती है।
देश की व्यवस्था देखिये कि भुल्लर ने पहले SSP मोहाली, DIG पटियाला रेंज जैसे पद संभाले हैं और 2021 में SAD नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के ड्रग्स मामले की SIT का नेतृत्व किया था। समझा जा सकता है कि एसआईटी में भुल्लर ने कितनी ईमानदारी से जांच क की होगी।
CBI को भुल्लर के ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी, सोना, लग्जरी सामान और हथियार बरामद हुए हैं।








