कतर पर इजरायली हमले से खाड़ी देशों में हलचल: अमेरिका का भरोसा डगमगाया, चीन की ओर रुझान?

9 सितंबर को इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास के वरिष्ठ नेताओं पर हवाई हमला किया, जिसमें हमास के पांच सदस्यों और एक कतरी सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई। यह हमला हमास के उन नेताओं को निशाना बनाने के लिए था जो गाजा युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। कतर, जो इजरायल-हमास वार्ताओं का प्रमुख मध्यस्थ रहा है, ने इसे “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” करार दिया। इस घटना ने खाड़ी देशों में व्यापक चिंता पैदा कर दी है, जहां अमेरिका पर सुरक्षा गारंटी का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खाड़ी राष्ट्र चीन की ओर अधिक झुक सकते हैं।
घटना का विवरण

क्या हुआ? इजरायली वायुसेना ने दोहा के लेक्तैफिया इलाके में एक आवासीय परिसर पर 10 बम गिराए, जहां हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मीटिंग कर रहे थे। हमास ने दावा किया कि उसके वरिष्ठ नेता बच गए, लेकिन खलील अल-हय्या के बेटे समेत पांच सदस्य मारे गए। कतर के आंतरिक सुरक्षा बल का एक सदस्य भी शहीद हुआ।
इजरायल का दावा: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “पूर्ण रूप से उचित” बताया, कहा कि हमास नेता 7 अक्टूबर 2023 के हमले के जिम्मेदार थे। यह हमला यरूशलेम में हमास-दावा वाले हमले के बाद किया गया।
कतर की प्रतिक्रिया: प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान ने इसे “राज्य आतंकवाद” कहा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। कतर ने कानूनी टीम गठित की है ताकि इजरायल को जवाबदेह ठहराया जा सके।

खाड़ी देशों में खलबली
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने हमले की कड़ी निंदा की, इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। सऊदी अरब, यूएई और अन्य ने कतर के साथ एकजुटता दिखाई:

सऊदी अरब: विदेश मंत्रालय ने “क्रूर इजरायली आक्रमण” की निंदा की और कहा कि यह “क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करता है”। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कतरी शासक से बात की और “अपराधी कृत्य” कहा।
यूएई: इसे “कायरतापूर्ण और धोखेबाज हमला” बताया, कहा कि खाड़ी देशों की सुरक्षा अविभाज्य है। यूएई ने इजरायल के साथ अब्राहम समझौते के बावजूद कतर का समर्थन किया।
अन्य GCC देश: कुवैत और बहरीन ने भी निंदा की, कहा कि यह मध्यस्थता प्रयासों को नष्ट करता है।

यह हमला खाड़ी के लिए पहला है, जहां इजरायल ने अब तक सीधे हमला नहीं किया था। इससे GCC देशों में डर फैला कि इजरायल की “अनियंत्रित” कार्रवाई उनके क्षेत्र तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह इजरायल को क्षेत्रीय “अस्थिरता का स्रोत” बनाता है।
अमेरिका पर भरोसा टूटा
अमेरिका, कतर का प्रमुख सहयोगी (अल उदैद एयरबेस पर हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात), ने हमले की आलोचना की, लेकिन देरी से सूचना मिलने का हवाला दिया:

ट्रंप प्रशासन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “कतर एक संप्रभु राष्ट्र और अमेरिका का करीबी सहयोगी है… यह हमला इजरायल या अमेरिका के लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाता।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इजरायल ने हमले से ठीक पहले सूचना दी, लेकिन रोकना संभव नहीं था। ट्रंप ने कतरी अधिकारियों से बात की और आश्वासन दिया कि ऐसा फिर नहीं होगा।
भरोसे का संकट: GCC देशों को लगता है कि अमेरिका इजरायल को नियंत्रित नहीं कर पा रहा। कतर के हमले से पहले ईरान ने अल उदैद पर हमला किया था, जो अमेरिकी रक्षा प्रणालियों से रोका गया था। अब GCC को डर है कि अमेरिकी “सुरक्षा छतरी” कमजोर हो रही है। एक विश्लेषक ने कहा, “अमेरिका इजरायल को रोक नहीं सका, तो GCC का भरोसा कैसे बरकरार रहेगा?”

X (पूर्व ट्विटर) पर चर्चा में भी अमेरिकी भूमिका पर सवाल उठे, जैसे कि इजरायली जेट्स को रिफ्यूलिंग और हवाई क्षेत्र अनुमति।
चीन की शरण में जाने की संभावना
इस घटना से GCC देश अमेरिका पर निर्भरता कम करने की ओर बढ़ सकते हैं, जहां चीन पहले से ही आर्थिक साझेदार है:

चीन का प्रभाव: चीन GCC के प्रमुख तेल खरीदार है और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत अरबों डॉलर निवेश कर चुका है। सऊदी और यूएई ने चीन के साथ रक्षा समझौते बढ़ाए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी कमजोरी से GCC चीन को सुरक्षा भागीदार के रूप में देख सकता है।
संभावित बदलाव: कतर ने कहा कि वह मध्यस्थता जारी रखेगा, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से GCC अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पर पुनर्विचार कर सकता है। ट्रंप ने कतर के साथ रक्षा समझौते को अंतिम रूप देने का आदेश दिया, लेकिन भरोसा बहाल करने के लिए पर्याप्त नहीं लगता।

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यह घटना गाजा युद्ध को और जटिल बना रही है, जहां 64,000 से अधिक फिलिस्तीनी मा

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