इसके साथ ही, यूनुस सरकार के तहत बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सैन्य और रणनीतिक संबंधों में सुधार देखा जा रहा है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान की आईएसआई की एक हाई-लेवल टीम ढाका पहुंची, जिसमें मेजर जनरल शाहिद अमीर अफसर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। यह कदम भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव के बीच उठाया गया है, खासकर तब जब यूनुस ने चीन के साथ भी 2.1 बिलियन डॉलर के निवेश और तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चर्चा की, जिससे भारत की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
हालांकि, यूनुस ने दावा किया है कि उनकी नीतियां भारत के खिलाफ नहीं हैं और वे SAARC जैसे क्षेत्रीय संगठनों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की बात करते हैं। फिर भी, बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें, साथ ही कट्टरपंथी ताकतों के बढ़ते प्रभाव ने भारत में नाराजगी पैदा की है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश हो सकती है, जो बांग्लादेश को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।






