पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल ही में अमेरिका में दिए बयान में दावा किया कि पाकिस्तान में आतंकवाद बढ़ने के लिए अमेरिका की नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अफगानिस्तान नीति पर सवाल उठाए, जिसमें 2020 में लिए गए फैसले का जिक्र किया। बिलावल ने कहा कि अमेरिका के अफगानिस्तान से हटने के बाद वहां छोड़े गए हथियार पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, लेकिन पाकिस्तान की अपनी भूमिका को स्वीकार नहीं किया, जैसे कि अतीत में अफगानी मुजाहिदीन को समर्थन देना।
हालांकि, बिलावल का यह बयान अमेरिका में विवादास्पद रहा। अमेरिकी सांसद ब्रैड शेरमैन ने उनके नेतृत्व वाले पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की नसीहत दी। शेरमैन ने 2002 में पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या में जैश की भूमिका का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने का दबाव डाला। बिलावल के दौरे का समय भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि उसी समय भारतीय प्रतिनिधिमंडल, शशि थरूर के नेतृत्व में, ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के बाद भारत का पक्ष रखने के लिए अमेरिका में मौजूद था। बिलावल के बयानों को कई विशेषज्ञों ने पाकिस्तान की पुरानी रणनीति का हिस्सा माना, जिसमें वह आतंकवाद में अपनी संलिप्तता को कम करने के लिए पश्चिमी देशों पर दोष मढ़ता है।






