अदालत में दायर हलफनामे में डीएमआरसी का दावा – हमारे पास कुल 5800 करोड़ रुपये का फंड है

नई दिल्ली| दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया है कि उसके पास 17 दिसंबर, 2021 तक कुल 5,800.93 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध है। डीएमआरसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामे में अपने कुल फंड की स्थिति बताई है।

इसके स्वयं के हलफनामे के अनुसार, डीएमआरसी की फंड स्थिति, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्च र को मध्यस्थता के तौर पर भुगतान करने की उसकी क्षमता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती है।

6 दिसंबर, 2021 को पिछली सुनवाई में अदालत के निर्देशों के अनुसार, डीएमआरसी की ओर से एक एस्क्रो खाते में पहले ही 1,000 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में आए करोड़ों रुपये के मध्यस्थता फैसले के तहत इसने एस्क्रो खाते में 1,000 करोड़ रुपये जमा किए हैं।

डीएमआरसी को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्च र की सहायक कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को लगभग 7,200 करोड़ रुपये मध्यस्थता के तौर पर देने हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर, 2021 को डीएएमईपीएल के पक्ष में 7,200 करोड़ रुपये के मध्यस्थ निर्णय को बरकरार रखा था, जो एक रिलायंस इंफ्रा शाखा है, जो दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो लाइन का संचालन करती है।

डीएएमईपीएल द्वारा दायर निष्पादन याचिका पर अगली सुनवाई बुधवार यानी 22 दिसंबर, 2021 को होनी है।

6 दिसंबर को पिछली सुनवाई में, दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएमआरसी को निर्देश के अनुसार ब्याज के साथ देय कुल राशि के संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

सूत्रों के मुताबिक, डीएमआरसी द्वारा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्च र को मध्यस्थता के पैसे के भुगतान में हर एक दिन की देरी के कारण डीएमआरसी पर प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज बोझ पड़ रहा है। इस मामले में शीर्ष अदालत द्वारा 9 सितंबर को आदेश सुनाए जाने के बाद से डीएमआरसी की ब्याज देनदारी पहले ही लगभग 200 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें डीएएमईपीएल के पक्ष में मध्यस्थ निर्णय को रद्द कर दिया गया था, जिसने सुरक्षा मुद्दों पर एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो लाइन चलाने से हाथ खींच लिया था।

बता दें कि डीएमआरसी ने डीएएमईपीएल से एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के निर्माण और परिचालन के लिए समझौता किया था, लेकिन कॉरिडोर बनकर तैयार होने और परिचालन शुरू होने के कुछ ही समय बाद कॉरिडोर में तकनीकी खराबी की बात सामने आई थी।

तकनीकी खामी व कॉरिडोर की मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या अनुमान से कम होने के कारण विवाद बढ़ने पर डीएमआरसी ने एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर परिचालन की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली थी। इसके बाद डीएएमईपीएल ने मध्यस्थ न्यायाधिकरण में अपील दायर कर डीएमआरसी से नुकसान की भरपाई करने की मांग की थी। मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने डीएएमईपीएल के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

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