पार्टी की दुर्दशा में भी वंशवाद में उलझी मायावती!

चरण सिंह 
किसी समय मुलायम यादव पर वंशवाद का आरोप लगाने वाले बसपा मुखिया मायावती ने बसपा की बागडोर पूरी तरह से अपने परिवार को सौंपने की तैयारी कर ली है। जब उन्होंने अपना 69 वां जन्मदिन मनाया तो उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले राष्ट्रीय कोर्डिनेटर आकाश आनंद के साथ ही उनका दूसरा भतीजा ईशान आनंद भी साथ दिखाई दिया। ईशान आनंद की उपस्थिति यह दर्शा रही रही है कि मायावती अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को भी लांच करने जा रही है। मतलब बसपा का जिम्मा अब दोनों भाई आकाश आनंद और ईशान आनंद संभालेंगे।दरअसल मायावती के भाई आनंद जो राष्ट्रीय महासचिव भी हैं, बीमार चल रहे हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मायावती अपने छोटे बेटे ईशान आनंद को राजनीति में सक्रिय करने जा रही हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब उन्होंने लोकसभा चुनाव में आकाश आनंद को बीजेपी के खिलाफ बोलने पर घर बैठा दिया था तो वह ईशान आनंद को कुछ बोलने देंगी। कहने को तो मायावती दिल्ली  विधानसभा चुनाव में असाधारण जीत का दावा कर रही रही हैं पर दलितों को बढ़ाने के नाम पर  अपने परिवार को भी बढ़ावा दे रही है। बसपा की स्थिति यह है कि मायावती ने अपने परिवार के अलावा किसी दलित को नेता नहीं बनाया। आजाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद भी किसी समय बसपा में हुआ करते थे। जब उन्होंने अपना वजूद बनाना चाहा तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा गया। आज की तारीख में चंद्रशेखर आज़ाद ही मायावती के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। देखने की बात यह है कि किसी समय उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बड़ों को धूल चटाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती के तेवर लगातार ख़त्म होते जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार के दबाव से बाहर वह निकल नहीं पा रही हैं। गत लोकसभा चुनाव में भी यह देखने को मिला था। मायावती ने अपने दम पर चुनाव लड़ा और खाता भी न खोल पाई। ऐसा ही विधानसभा उप चुनाव में भी देखने को मिला। अक्सर जन्मदिन पर बड़ा संदेश देने वाली मायावती इस जन्मदिन पर बेबस दिखाई दीं। उन्होंने कांग्रेस और सपा ही हमला बोला। बीजेपी खिलाफ बोलने में तो उन्होंने मात्र औपचारिकता ही दिखाई। मायावती ने अपना 69 वां जन्मदिन तो बड़े तामझाम से मनाया पर ऐसा कुछ न कर सकीं कि उनकी पार्टी पुराने रुतबे में लौट आये। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि ईशान आनंद को उन्होंने लांच कर भी दिया तो इससे बसपा का क्या फायदा होगा। कार्यकर्ताओं का मनोबल कैसे बढ़ेगा ?

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