बिहार में शिक्षकों का ट्रांसफर शुरू

 पटना। बिहार में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण में 35 गंभीर बीमार शिक्षकों का तबादला हुआ। तीन शिक्षकों के आवेदन रद्द हुए क्योंकि जरूरी कागज नहीं थे। नौ आवेदनों पर फिर से विचार होगा। लगभग 1.9 लाख शिक्षकों ने तबादले के लिए आवेदन किया था। तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। पदस्थापन आदेश संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी जारी करेंगे। यह आदेश ऑनलाइन उपलब्ध होगा।
बिहार में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म हुआ। स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले चरण में 35 विशिष्ट शिक्षकों का तबादला हुआ है। ये सभी शिक्षक कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। शिक्षा विभाग ने तबादले के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। यह प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से हुई। लगभग 1.9 लाख शिक्षकों ने तबादले के लिए आवेदन किया था। इन आवेदनों में से पहले चरण में 35 आवेदनों को स्वीकृति मिली है।
पहले चरण में तीन शिक्षकों के आवेदन रद्द कर दिए गए। इन आवेदनों में जरूरी दस्तावेज नहीं थे। इसके अलावा नौ शिक्षकों के आवेदन संबंधित श्रेणी के नहीं पाए गए। इन आवेदनों पर फिर से विचार किया जाएगा। स्वीकृत आवेदनों पर तबादला/पदस्थापन कुछ शर्तों के साथ किया गया है। अंतर-जिला स्थानांतरण के मामले में, पदस्थापन आदेश स्थानांतरित जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा। यह आदेश एक कार्यदिवस के भीतर जारी होगा।
स्थानांतरित शिक्षक को सात कार्यदिवसों के भीतर नए जिले में योगदान देना होगा। तबादले से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित शिक्षक पर कोई आरोप लंबित न हो और उनके वेतन व अन्य दायित्वों का निपटारा हो चुका हो। अंतर-जिला स्थानांतरण की स्थिति में वरीयता नए जिले में योगदान की तिथि से तय होगी। जिले के अंदर स्थानांतरण के लिए स्थानांतरण आदेश संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा।
पदस्थापन का आदेश संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी ई-शिक्षाकोष पोर्टल से डाउनलोड करेंगे। हस्ताक्षर के बाद इसे फिर से पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह आदेश संबंधित शिक्षक, प्रधानाध्यापक और अन्य अधिकारियों के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा, बिहार में शिक्षकों को टैबलेट दिए जाने की योजना है। मार्च से बच्चों की हाजिरी डिजिटल रूप से दर्ज होने की संभावना है। यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

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