चरण सिंह
फैजाबाद के सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अयोध्या में रामपथ के धंसने और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में अनियमितता बरते जाने के मुद्दे को संसद में उठाकर भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अलग आफत खड़ी कर दी है। अवधेश प्रसाद ने संसद में कहा कि एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए जो जमीन ली गई वह अधिकतर ओबीसी निषाद समाज के लोगों की है। अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि अयोध्या में मंदिर के नाम पर लोगों की जमीन औने पौने दाम पर ली गई और भाजपा नेताओं ने उसे मोटे दाम पर सरकार को दे देकर करोड़ा का मुनाफा कमाया। सांसद का सीधा आरोप है कि जो जमीन दो करोड़ की खरीदी गई वह दो घंटे में १८ करोड़ की बेच दी गई। मतलब लोगों को तो ठगा गया पर भाजपा नेता मालामाल हो गये।
दरअसल जब राम मंदिर का निर्माण चल रहा था तो प्रतिदिन राम मंदिर में भगवान राम के दर्शन करने के लिए ३-५ लाख तक दर्शनाथियों के आने की बात कही जा रही थी। वह बात दूसरी है कि पहली बारिश में ही रामपथ धंसने के बाद कितने दर्शनार्थी राम मंदिर में राम के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं ? तो क्या फैजाबाद चुनाव हारने के बाद बीजेपी नेताओं का राम से माहभंग हो गया है। अब तो खुद प्रधानमंत्री जय श्रीराम की जगह जव जगन्नाथ बोलने लगे हैं। तो क्या जब तक राम बीजेपी को चुनाव जितवाते रहे तब तक बीजेपी नेता जय श्रीराम के नारे लगाते रहे और अब जब बीजेपी ने राम मंदिर से खिलवाड़ कर दी तब से बीजेपी से राम नाराज हो गये। मतलब बीजेपी नेताओं की राम में कोई आस्था नहीं है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो पर्यटक अयोध्या में जा रहे हैं उनसे अयोध्यावासियों से कुछ न खरीदने के लिए कहा जा रहा है।
मतलब अयोध्यावासियों को एहसास कराया जा रहा है कि तुमने बीजेपी को वोट नहीं दिया तो उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऐसे में भाजपा अयोध्यावासियों से दुश्मनी निकाल रही है या फिर राम से। इस व्यवहार से तो राम मंदिर प्रभावित होगा। वैसे भी पहली ही बारिश में मंदिर की छत टपकने लगी थी। खुद मंदिर के मुख्य पुजारी ने यह बात कही थी। मतलब लोकसभा चुनाव के लिए मंदिर का निर्माण हुए बिना भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई। कुछ लोग भाजपा की हार को अधूरे निर्माण में राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करने को मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि भाजपा के इस कृत्य से राम में आस्था व्यक्त करने वाले लोग भी आहत हैं। अवधेश प्रसाद के इस मुद्दे को उठाने में योगी आदित्यनाथ भी गेम कर सकते हैं।
दरअसल केशव प्रसाद मौर्य तो एक मोहरा माना जा रहा है। योगी की असली लड़ाई तो गृहमंत्री अमित शाह से हैं। ऐसे में अयोध्या में काम करने वाली कंपनियों के काम की जांच कराकर गुजरात की कंपनियों के नाम पर अमित शाह को घेरा जा सकता है। वैसे भी योगी आदित्यनाथ के साथ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ओैर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी खुलकर सामने आ गये हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि बहुत जल्द रक्षामंत्री राजनाध सिंह, मेनका गांधी, राहुल वरुण गांधी, सुब्रमण्यम स्वामी समेत कई बड़े नेता योगी आदित्यनाथ के पीछे माने आने वाले हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ आज की तारीख में सबसे बड़ा नेता हैं।