Faith : कैलाश मानसरोवर और औरंगजेब 

द न्यूज 15 

राहुल गाँधी कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर हैं और वह नेपाल और चीन होते हुए शिव जी के वास की जगह कैलाश मानसरोवर जाएँगे। भारत में सनातन धर्म के मानने वालों में शिव जी की पूजा और आस्था रामचंद्र से अधिक इसलिए है क्योंकि जितने मंदिर और मुर्तियाँ शिव जी और शिवलिंग की इस देश या विदेश में है उतनी रामचंद्र जी की नहीं।

धार्मिक महत्व की बात की जाये तो शिव को ईश्वर माना गया है और रामचंद्र जी को ईश्वर का अवतार पुरुषोत्तम अर्थात पुरुषों में सर्वोत्तम अर्थात मनुष्य। रामचंद्र जी के इसी धरती पर कम से कम 12 जगह जन्म लेने की मान्यता के आधार पर रामजन्म भूमि मानकर मंदिर बनाया गया और आज भी पूजा जाता है, जिनमें 5 स्थान तो आज की अयोध्या में ही है , शेष कुरुक्षेत्र , कंबोडिया , पाकिस्तान और थाईलैंड में हैं।

कहने का अर्थ यह है कि रामचंद्र जी के जन्म को लेकर सनातनी ही एकमत नहीं हैं जबकि शिव के वास वाले “कैलाश मानसरोवर” को लेकर सभी एकमत हैं और किसी तरह का कोई विवाद कभी नहीं रहा। आज भी नहीं है। यह अपने आप में आश्चर्य है कि आजतक भारत या भारत सरकार या 800 साल बाद बने शुद्ध हिन्दू शासक ने कभी कैलाश मानसरोवर को चीन के कब्ज़े से ना तो मुक्त कराने की कोई कोशिश की न कैलाश मानसरोवर को चीन की कैद से मुक्त कराने के लिए कोई आंदोलन हुआ।

अर्थात शिव जी के निवास स्थान को चीन ने कब्जा किया हुआ है और उसे मुक्त कराने की आज तक किसी सरकार ने कोई कोशिश नहीं की जबकि 12 जगह जन्म की मान्यता वाले रामचंद्र जी के जन्मस्थान पर देश में पूरी महाभारत हो चुकी है और हो रही है। दरअसल आज़ादी के बाद चीन ने “कैलाश पर्वत व कैलाश मानसरोवर” और अरुणाचल प्रदेश के बड़े भूभाग पर जब कब्ज़ा कर लिया तो देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी UNO पहुंचे की चीन ने ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर लिया है, हमारी ज़मीन हमें वापस दिलाई जाए।

इस पर चीन ने जवाब दिया कि हमने भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया है बल्कि अपना वो हिस्सा वापस लिया है जो हमसे भारत के एक शहंशाह ने 1680 में चीन से छीन कर ले गया था। यह जवाब UNO में आज भी ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में मौजूद है। दरअसल चीन ने पहले भी इस हिस्से पर कब्ज़ा किया था, बताया जाता है कि जिस पर औरंगज़ेब ने उस वक़्त चीन के चिंग राजवंश के राजा “शुंजी प्रथम” को ख़त लिख कर गुज़ारिश की थी कि कैलाश मानसरोवर हिंदुस्तान का हिस्सा है और हमारे हिन्दू भाईयों की आस्था का केन्द्र है, लिहाज़ा इसे छोड़ दें।

यह बात भी बताई जाती है कि  जब डेढ़ महीने तक किंग “शुंजी प्रथम” की तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो औरंगजेब ने चीन पर चढ़ाई कर दी, जिसमें औरंगजेब ने साथ लिया कुमाऊँ के राजा “बाज बहादुर चंद” का और सेना लेकर कुमाऊँ के रास्ते ही मात्र डेढ़ दिन में “कैलाश मानसरोवर” लड़ कर वापस छीन लिया। आज़ादी के वक़्त के UNO के हलफनामे में इस तरह की बात होने का दावा किया जाता है।

  • Related Posts

    दिल्ली जंतर मंतर पर युवाओं के आंदोलन में कहां थी एबीवीपी और झारखंड में कहां है एनएसयूआई ?
    • TN15TN15
    • August 11, 2026

    युवाओं नहीं बल्कि अपनी अपनी पार्टियों के लिए…

    Continue reading
    1942 से लेकर आज तक दिल्ली के सोशलिस्टों की ‌ 9 अगस्त को भागीदारी का इतिहास!
    • TN15TN15
    • August 10, 2026

    प्रोफेसर राजकुमार जैन दिल्ली के सोशलिस्ट बड़ी शिद्दत…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    मुजफ्फरनगर दंगे में सपा सांसद समेत 22 नेताओं के मुकदमे वापस, BJP नेताओं भी राहत

    • By TN15
    • August 13, 2026
    मुजफ्फरनगर दंगे में सपा सांसद समेत 22 नेताओं के मुकदमे वापस, BJP नेताओं भी राहत

    संवैधानिक अधिकारों की गारंटी करे सरकार

    • By TN15
    • August 13, 2026
    संवैधानिक अधिकारों की गारंटी करे सरकार

    चला गया एक और समाजवादी पुरोधा !

    • By TN15
    • August 13, 2026
    चला गया एक और समाजवादी पुरोधा !

    ललितपुर में भारतीय सोशलिस्ट मंच का जनसंवाद कार्यक्रम !

    • By TN15
    • August 13, 2026
    ललितपुर में भारतीय सोशलिस्ट मंच का जनसंवाद कार्यक्रम !

    किसान संघर्ष समिति की 344वीं किसान पंचायत संपन्न

    • By TN15
    • August 12, 2026
    किसान संघर्ष समिति की 344वीं किसान पंचायत संपन्न

    ‘राहुल गांधी के रूप में जिन्ना..’: बीजेपी MP ने कांग्रेस नेतृत्व पर लगाया बेहद गंभीर आरोप- डूब मरना चाहिए

    • By TN15
    • August 12, 2026
    ‘राहुल गांधी के रूप में जिन्ना..’: बीजेपी MP ने कांग्रेस नेतृत्व पर लगाया बेहद गंभीर आरोप- डूब मरना चाहिए