वायु प्रदूषण: भट्ठा मालिकों को करना होगा नए नियमों का पालन

द न्यूज 15 
नई दिल्ली । देश में ईंट के भट्ठों से होने वाली प्रदूषण को कम करने के लिए अब भट्ठे मालिकों को नए नियमों का पालन करना होगा। केंद्र सरकार के केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इन नियमों को तैयार किया है और इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। ये आदेश सभी राज्यों में लागू होंगे। इन नियमों की मदद से आम जनता को स्थानीय स्तर पर बढ़ते प्रदूषण के स्तर से राहत मिलेगी।

नई व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) संशोधन नियम 2022 तैयार किए हैं। इन नियमों के मुताबिक भट्ठों के लिए चिमनी की न्यूनतम ऊंचाई को अधिक किया गया है। जिन भट्ठों की क्षमता 30 हजार ईंट प्रतिदिन से कम है। उनके लिए चिमनी की ऊंचाई 14 मीटर (लोडिंग प्लेटफार्म से कम से कम 7.5 मीटर) होगी।

वहीं 30 हजार से अधिक ईंट निर्माण करने वाले भट्ठों को 16 मीटर ऊंची चिमनी ( लोडिंग प्लेटफार्म से कम से 8.5 मीटर) की व्यवस्था करनी होगी। माना जा रहा है कि धुंए के लिए ऊंचाई बढ़ने से र्इंट के भट्ठे के आसपास के इलाकों का प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। यह अधिसूचना पर्यावरण विभाग के अपर सचिव नरेश पाल गंगवाल ने जारी की है।   मंत्रालय ने यह भी प्रावधान किया है कि जो भी नए भट्ठे खोले जाएंगे, उन्हें जिंग जैग तकनीक या वर्टिकल शाफ्ट के लिए प्राकृतिक गैस के उपयोग की अनुमति दी जाएगी। जो भट्ठे इस तकनीक का प्रयोग नहीं कर रहे होंगे, उन्हें दो वर्ष के अंदर अपने भट्ठों में इस व्यवस्था को लागू करना होगा। प्रदूषण से बचाव के लिए जिन राज्यों में स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से जो भी प्रावधान किए गए हैं, उन प्रावधानों का तय नियमनुसार पालन करना होगा। भविष्य में सभी भट्ठे केवल अनुमोदिन प्राकृतिक गैस, कोयला, कृषि अपशिष्टों का प्रयोग करेंगे। इन जगहों पर गोबर उपले, टायर, प्लास्टिक और खतरनाक अपशिष्ट के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। मंत्रालय के मुताबिक उत्सर्जन की निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक स्थायी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसकी मदद से इनके प्रदूषण पर नजर रखी जाएगी।

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